TMC Split – बागी सांसदों के दावों से बढ़ी सियासी असमंजस की स्थिति
TMC Split – पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा असंतोष लगातार नए मोड़ ले रहा है। पार्टी से जुड़े अलग-अलग नेताओं के बयानों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। हालिया घटनाक्रम में लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने विधानसभा में सक्रिय बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी से सार्वजनिक रूप से दूरी बनाते हुए संकेत दिया है कि दोनों पक्षों की राजनीतिक सोच और प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं।

इसी बीच, पार्टी के एक और राज्यसभा सांसद के इस्तीफे की खबर ने अंदरूनी हलचल को लेकर चर्चाओं को और तेज कर दिया है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि मौजूदा हालात तृणमूल कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण संगठनात्मक चुनौती बन सकते हैं।
अलग-अलग दिशा में बढ़ते दिख रहे दोनों गुट
बागी नेताओं के हालिया बयानों से यह स्पष्ट संकेत मिला है कि पार्टी से असहमति रखने वाले सभी नेता एक समान रणनीति के तहत काम नहीं कर रहे हैं। जहां ऋतब्रत बनर्जी राज्य की राजनीति में अपनी स्वतंत्र भूमिका को मजबूत करने की बात कर रहे हैं, वहीं काकोली घोष दस्तीदार का फोकस संसद और राष्ट्रीय स्तर की राजनीति पर दिखाई दे रहा है।
मीडिया से बातचीत में काकोली ने कहा कि उनकी राजनीतिक पहल को किसी अन्य नेता के साथ जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि उन्होंने अपनी आवाज स्वतंत्र रूप से उठाई थी और अब उनके साथ कई अन्य सांसद भी जुड़े हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य राज्य और जनता से जुड़े मुद्दों पर काम करना है।
कल्याण बनर्जी को लेकर भी जताया स्पष्ट रुख
काकोली घोष दस्तीदार ने सांसद कल्याण बनर्जी के साथ किसी भी प्रकार की राजनीतिक साझेदारी की संभावना से इनकार किया है। उन्होंने बताया कि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को एक औपचारिक शिकायत भेजी है, जिसमें संसद के भीतर कथित व्यवहार को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई है।
उनका कहना था कि इस मुद्दे पर उनकी असहमति व्यक्तिगत और सिद्धांत आधारित है, इसलिए वह भविष्य में भी उनके साथ किसी साझा मंच का हिस्सा बनने की इच्छुक नहीं हैं। इस मामले को लेकर आगे संसदीय प्रक्रिया क्या रूप लेती है, इस पर नजर बनी हुई है।
ऋतब्रत बनर्जी ने प्रतिक्रिया देने से किया परहेज
जब काकोली घोष दस्तीदार के बयानों के बारे में ऋतब्रत बनर्जी से सवाल किया गया, तो उन्होंने इस विषय पर विस्तृत टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि वह ऐसे विवादों में नहीं पड़ना चाहते।
सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं के समर्थक अपने-अपने राजनीतिक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में जुटे हैं। यही वजह है कि बागी खेमे के भीतर भी एक समान नेतृत्व या रणनीति की तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं दिखाई दे रही है।
सांसदों के समर्थन को लेकर विरोधाभासी दावे
काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया है कि लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के कई सांसद उनके साथ हैं और एक अलग संसदीय समूह को लेकर समर्थन दे चुके हैं। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक स्तर पर कोई पुष्टि सामने नहीं आई है।
दूसरी ओर, कुछ सांसदों ने सार्वजनिक रूप से ऐसे दावों को खारिज किया है। आसनसोल से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने साफ कहा कि उनकी निष्ठा पार्टी और ममता बनर्जी के प्रति बनी हुई है। वहीं जयनगर से सांसद प्रतिमा मंडल ने भी कथित समर्थन संबंधी खबरों को निराधार बताया।
दिल्ली की बैठक को लेकर बढ़ी राजनीतिक चर्चा
राजनीतिक गलियारों में उस बैठक की भी चर्चा है, जो हाल ही में दिल्ली में आयोजित होने की बात कही जा रही है। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में कुछ सांसदों और वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी को लेकर दावे किए गए हैं।
बैठक में शामिल होने को लेकर जिन नेताओं के नाम सामने आए हैं, उनकी ओर से अब तक कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इसके बावजूद राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं जारी हैं।
आगे क्या होगा, इस पर बनी हुई है नजर
तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को नई दिशा दे दी है। अलग-अलग नेताओं के बयानों और समर्थन के दावों के बीच स्थिति लगातार बदलती नजर आ रही है। आने वाले दिनों में यदि कोई औपचारिक राजनीतिक या संसदीय कदम उठाया जाता है, तो इससे पूरे घटनाक्रम की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।