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Donald Trump Gaza Peace Board: गाजा की कमान अब शांति के दूतों के हाथ, तबाही के मलबे पर बिछेगा खुशहाली का कालीन

Donald Trump Gaza Peace Board: दुनिया के सबसे शक्तिशाली नेता डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा की सूरत बदलने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (शांति बोर्ड) के गठन का ऐलान कर दिया है। यह अंतरराष्ट्रीय निकाय गाजा में युद्ध के बाद न केवल शांति की नींव रखेगा बल्कि वहां के (Post War Reconstruction) कार्यों की सीधी निगरानी भी करेगा। वाइट हाउस द्वारा जारी की गई इस बोर्ड की सूची ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है क्योंकि इसमें ट्रंप ने खुद को अध्यक्ष के रूप में स्थापित किया है। यह फैसला इस बात का संकेत है कि अमेरिकी प्रशासन अब गाजा के भविष्य को लेकर कोई ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है और वहां एक नई व्यवस्था की शुरुआत होने जा रही है।

Donald Trump Gaza Peace Board
Donald Trump Gaza Peace Board

गाजा के लिए ट्रंप की 20 सूत्रीय विनाश से विकास की राह

राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बोर्ड को अपनी उस व्यापक योजना का केंद्र बनाया है जिसका उद्देश्य मध्य पूर्व में दशकों से चले आ रहे तनाव को जड़ से खत्म करना है। इस योजना के (Middle East Stability Plan) तहत हमास को पूरी तरह से सत्ता से बाहर करने और वहां हथियारों के दौर को समाप्त करने की तैयारी की गई है। योजना अब अपने दूसरे और सबसे महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुकी है जहां शासन की कमान हमास के बजाय एक तकनीकी फिलिस्तीनी प्रशासन को सौंपी जा रही है। यह महज एक प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि गाजा के आम नागरिकों के लिए समृद्धि और सुरक्षा के एक नए युग का वादा है।

अली शाथ की तकनीकी समिति और काहिरा की ऐतिहासिक बैठक

गाजा के प्रशासनिक कार्यों को पटरी पर लाने के लिए काहिरा में एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई जिसमें फिलिस्तीनी तकनीकी समिति के प्रमुख अली शाथ ने भविष्य का खाका पेश किया। अमेरिकी देखरेख में (Palestinian Technical Committee) की यह पहली बैठक गाजा के लोगों के लिए उम्मीद की किरण बनकर आई है। अली शाथ जो खुद गाजा के एक अनुभवी इंजीनियर और पूर्व अधिकारी रहे हैं, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पहली प्राथमिकता बेघर हुए लोगों को छत मुहैया कराना है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि युद्ध की विभीषिका से पूरी तरह उबरने में कम से कम तीन साल का समय लग सकता है।

इजरायली सेना की वापसी और विस्थापितों की घर वापसी की चुनौती

जैसे ही 10 अक्टूबर को संघर्षविराम लागू हुआ और इजरायली सेना ने पीछे हटना शुरू किया हजारों फिलिस्तीनी अपने खंडहर बन चुके घरों की ओर लौटने लगे। इस स्थिति में (International Security Force) की तैनाती और शांति व्यवस्था बनाए रखना ट्रंप प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हो रही है। जमीन पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मेजर जनरल जास्पर जेफर्स को जिम्मेदारी सौंपी गई है जो आतंक-मुक्त वातावरण तैयार करेंगे। ट्रंप की योजना का मुख्य आधार यही है कि जब तक सुरक्षा की गारंटी नहीं होगी तब तक विकास का पहिया आगे नहीं बढ़ पाएगा।

बोर्ड ऑफ पीस में शामिल हुए दुनिया के दिग्गज चेहरे

ट्रंप ने इस बोर्ड को दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित समूह बताते हुए इसमें कई प्रभावशाली हस्तियों को जगह दी है जो अलग-अलग क्षेत्रों के माहिर हैं। बोर्ड के संस्थापक सदस्यों में (Board of Peace Members) के तौर पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनेर और पूर्व ब्रिटिश पीएम टोनी ब्लेयर जैसे नाम शामिल हैं। इसके अलावा विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा और अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट के सीईओ मार्क रोवन को भी इस टीम का हिस्सा बनाया गया है। इन दिग्गजों को शासन क्षमता, क्षेत्रीय संबंध, पुनर्निर्माण और सबसे महत्वपूर्ण बड़े पैमाने पर फंडिंग जुटाने की जिम्मेदारी दी गई है।

टोनी ब्लेयर की नियुक्ति और उठते विवादों के स्वर

भले ही ट्रंप इस बोर्ड को ऐतिहासिक बता रहे हों लेकिन टोनी ब्लेयर जैसे नामों को लेकर अंतरराष्ट्रीय गलियारों में बहस छिड़ गई है। इराक युद्ध के इतिहास को देखते हुए मध्य पूर्व के कई देशों में उनकी (Controversial Political Appointments) को लेकर आपत्ति जताई जा रही है। आलोचकों का मानना है कि यह बोर्ड एक तरह की औपनिवेशिक संरचना है जहां विदेशी नेता दूसरे क्षेत्र के भाग्य का फैसला कर रहे हैं। हालांकि ट्रंप ने पहले ही संकेत दिए थे कि वह ब्लेयर की कार्यकुशलता के कायल हैं और उन्हें विश्वास है कि यह टीम गाजा को एक आधुनिक शहर में तब्दील कर देगी।

हमास का सत्ता त्याग और भविष्य की धुंधली राह

योजना के मुताबिक हमास शासन छोड़ने पर तो राजी हो गया है लेकिन पूरी तरह से हथियार डालने यानी निरस्त्रीकरण के मुद्दे पर अभी भी पेंच फंसा हुआ है। ट्रंप की (Gaza Governance Transition) प्रक्रिया तभी सफल हो पाएगी जब जमीन पर मौजूद हर हथियार को शांत कर दिया जाएगा। फिलिस्तीनी गुटों की ओर से अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है लेकिन ‘नेशनल कमिटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा’ (NCAG) ने अपना काम शुरू करने की तैयारी कर ली है। अली शाथ की यह समिति गैर-राजनीतिक रहकर केवल सार्वजनिक सेवाओं पर ध्यान केंद्रित करेगी ताकि लोगों का जीवन सामान्य हो सके।

शांति की नई सुबह या नियंत्रण का नया खेल

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 के समर्थन के साथ ट्रंप का यह बोर्ड अब एक कानूनी और अंतरराष्ट्रीय ताकत बन चुका है। गाजा के पुनर्निर्माण के लिए (Global Funding for Gaza) जुटाना इस बोर्ड का सबसे बड़ा लक्ष्य है ताकि वहां के इंफ्रास्ट्रक्चर को फिर से खड़ा किया जा सके। निकोलाय म्लादेनोव को हाई रिप्रेजेंटेटिव नियुक्त कर ट्रंप ने जमीन पर एक मजबूत संपर्क सूत्र स्थापित कर दिया है। अब देखना यह होगा कि अरबों डॉलर का यह निवेश और दिग्गजों का यह बोर्ड गाजा की तकदीर सच में बदल पाता है या यह सिर्फ फाइलों तक सीमित रह जाता है।

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