AmbulanceScam – गोरखपुर में एम्बुलेंस से मरीज को निजी अस्पताल ले जाने का खुलासा
AmbulanceScam – गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां सरकारी एम्बुलेंस से लाई गई एक बच्ची को निजी अस्पताल भेजने की कोशिश का खुलासा हुआ है। पुलिस ने इस मामले में एम्बुलेंस चालक, ईएमटी और निजी अस्पतालों से जुड़े लोगों सहित कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

अस्पताल परिसर में संदिग्ध गतिविधि से खुला मामला
पुलिस के अनुसार, यह घटना तब सामने आई जब मेडिकल कॉलेज के मुख्य गेट के पास सुरक्षाकर्मियों ने एक बच्ची को निजी एम्बुलेंस में ले जाते हुए देखा। स्थिति संदिग्ध लगने पर गार्डों ने तुरंत हस्तक्षेप किया और पुलिस को सूचना दी।
जांच में सामने आया कि बच्ची को सरकारी एम्बुलेंस से अस्पताल लाया गया था, लेकिन उसे बिना स्पष्ट प्रक्रिया के निजी अस्पताल भेजने की तैयारी की जा रही थी।
इलाज के नाम पर परिजनों को किया गया गुमराह
मामले की जांच में यह भी पता चला कि बच्ची को गंभीर हालत में सिद्धार्थनगर से लाया गया था। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था।
इसके बावजूद एम्बुलेंस कर्मियों ने परिजनों को यह कहकर भ्रमित किया कि बच्ची की हालत गंभीर है और सरकारी अस्पताल में पर्याप्त सुविधा उपलब्ध नहीं है। उन्होंने परिजनों को निजी अस्पताल में भर्ती कराने का सुझाव दिया।
निजी अस्पतालों से जुड़ा था पूरा नेटवर्क
पुलिस की पूछताछ में खुलासा हुआ कि इस पूरे मामले में निजी अस्पतालों के प्रबंधक भी शामिल थे। एम्बुलेंस कर्मियों ने पहले एक अस्पताल से संपर्क किया, जहां दूरी का हवाला देकर दूसरे अस्पताल के मैनेजर से बात कराई गई।
इसी दौरान बच्ची को निजी एम्बुलेंस में शिफ्ट करने की कोशिश की जा रही थी, जिसे मौके पर ही रोक लिया गया।
कमीशन के लिए चल रहा था खेल
जांच में यह भी सामने आया कि यह कोई एकल घटना नहीं थी, बल्कि एक संगठित नेटवर्क के तहत मरीजों को सरकारी अस्पतालों से निजी संस्थानों तक भेजा जाता था। इसके बदले एम्बुलेंस चालक और ईएमटी को कमीशन मिलता था, जो आमतौर पर पांच से दस हजार रुपये तक होता था।
पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क में शामिल कुछ लोगों के खिलाफ पहले से भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि यह गतिविधि लंबे समय से चल रही थी।
गिरफ्तारी के बाद सामने आए अहम तथ्य
पुलिस ने बताया कि पकड़े जाने के बाद आरोपियों ने बचने के लिए जल्दबाजी में दस्तावेज तैयार करने की कोशिश भी की, लेकिन जांच में उनकी भूमिका स्पष्ट हो गई।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
आगे की जांच जारी
फिलहाल पुलिस इस मामले में जुड़े अन्य संभावित लोगों की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि और नाम सामने आते हैं तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सिस्टम में पारदर्शिता और निगरानी की जरूरत को एक बार फिर सामने लाता है, जहां मरीजों के हितों से समझौता कर अवैध तरीके अपनाने की कोशिश की गई।



