ArmsLicense – हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से मांगी बाहुबलियों की पूरी रिपोर्ट
ArmsLicense – उत्तर प्रदेश में शस्त्र लाइसेंसों के दुरुपयोग और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को हथियार जारी किए जाने के मामलों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से सख्त जवाब तलब किया है। अदालत ने कहा है कि जिन लोगों के खिलाफ जानकारी मांगी गई थी, उनमें अब तक केवल आधे लोगों का ही विवरण उपलब्ध कराया गया है। शेष व्यक्तियों की जानकारी जल्द दाखिल करने के लिए कोर्ट ने सरकार को तीन दिन का अतिरिक्त समय दिया है।

सरकार ने पेश किया आंशिक ब्यौरा
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से गृह सचिव के हस्ताक्षर वाला अनुपालन हलफनामा पेश किया गया। सरकार ने अदालत को बताया कि कुल 83 व्यक्तियों में से 42 लोगों के शस्त्र लाइसेंस और संबंधित रिकॉर्ड की जानकारी जुटाकर प्रस्तुत कर दी गई है। बाकी 41 लोगों के दस्तावेज और अन्य विवरण एकत्र करने की प्रक्रिया अभी जारी है।
सरकार की ओर से अतिरिक्त समय की मांग की गई थी। अदालत ने एक सप्ताह की बजाय केवल तीन दिन की मोहलत देते हुए स्पष्ट कर दिया कि अगली तारीख के बाद किसी भी प्रकार का अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा।
कोर्ट ने दिखाई सख्ती
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि संबंधित विभागों को अपने सभी उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर समय सीमा के भीतर पूरी रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि अगली सुनवाई के दौरान पुलिस विभाग का एक वरिष्ठ अधिकारी कोर्ट में मौजूद रहे, जिसे मामले से जुड़े सभी तथ्यों और जिलों से प्राप्त सूचनाओं की पूरी जानकारी हो।
अदालत ने साफ किया कि शस्त्र लाइसेंस जैसे संवेदनशील मामलों में प्रशासनिक लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। कोर्ट का मानना है कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है।
कई चर्चित नामों पर मांगी गई जानकारी
कोर्ट ने जिन लोगों के संबंध में जानकारी तलब की है, उनमें प्रदेश की राजनीति और बाहुबली छवि से जुड़े कई चर्चित नाम शामिल हैं। अदालत ने इन व्यक्तियों के शस्त्र लाइसेंस, उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमों, वर्तमान पते और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी विस्तृत जानकारी मांगी है।
याचिका में यह मुद्दा उठाया गया था कि कई प्रभावशाली लोग सार्वजनिक रूप से हथियारों का प्रदर्शन करते हैं, जिससे समाज में भय का माहौल बनता है। अदालत ने इस पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि आत्मरक्षा के नाम पर हथियारों का खुलेआम प्रदर्शन सामाजिक संतुलन और सार्वजनिक शांति के लिए ठीक नहीं माना जा सकता।
सार्वजनिक प्रदर्शन पर भी जताई चिंता
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि हथियारों का प्रदर्शन कई बार शक्ति और दबदबे का संदेश देने के लिए किया जाता है। इससे आम नागरिकों में असुरक्षा की भावना पैदा होती है और सामाजिक वातावरण प्रभावित होता है।
अदालत ने यह भी कहा कि लाइसेंसी हथियारों का उद्देश्य केवल वैधानिक सुरक्षा तक सीमित होना चाहिए। यदि इनका इस्तेमाल भय पैदा करने या प्रभाव जमाने के लिए किया जाता है, तो यह कानून की भावना के विपरीत माना जाएगा।
अगली सुनवाई पर टिकी नजर
अब इस मामले की अगली सुनवाई 29 मई को निर्धारित की गई है। अदालत को उम्मीद है कि तब तक राज्य सरकार सभी लंबित जानकारियां प्रस्तुत कर देगी। मामले पर प्रशासनिक और कानूनी हलकों की नजर बनी हुई है, क्योंकि यह विषय प्रदेश में शस्त्र लाइसेंस व्यवस्था और उसके नियंत्रण से सीधे जुड़ा हुआ है।