BankeBihariTemple – दशकों से बंद अलमारियां खुलेंगी, समिति ने लिए अहम फैसले
BankeBihariTemple – वृंदावन स्थित प्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में वर्षों से बंद रखी गई अलमारियों और बक्सों को खोलने की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। मंदिर प्रबंधन से जुड़ी उच्च स्तरीय समिति ने इस संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। माना जा रहा है कि लंबे समय से बंद इन स्थानों को खोलने के बाद मंदिर से जुड़ी कई ऐतिहासिक और प्रशासनिक जानकारियां सामने आ सकती हैं। इसके साथ ही मंदिर में मौजूद लगभग 200 किलोग्राम वजनी स्वर्णजड़ित झूले के संरक्षण और मरम्मत का कार्य भी कराया जाएगा।

समिति की बैठक में लिए गए कई महत्वपूर्ण निर्णय
मंगलवार को आयोजित हाई पावर्ड टेम्पल मैनेजमेंट कमेटी की 16वीं बैठक में मंदिर व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़े अनेक मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अशोक कुमार ने की। उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप समिति में चार गोस्वामियों का चयन किया गया है। इनमें एक पूर्व सदस्य के साथ तीन नए गोस्वामियों को भी समिति में शामिल किया गया है।
बैठक में नए सदस्यों की उपस्थिति के साथ मंदिर प्रबंधन से जुड़े कई लंबित विषयों पर निर्णय लिए गए, जिनका उद्देश्य मंदिर की व्यवस्था को और अधिक सुव्यवस्थित बनाना है।
प्रसाद सामग्री की गुणवत्ता पर चिंता
बैठक के दौरान मंदिर क्षेत्र में बिकने वाली मावा आधारित प्रसाद सामग्री की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई। समिति के अध्यक्ष ने बताया कि जानकारी मिली है कि बड़ी मात्रा में मावा एक विशेष क्षेत्र से लाया जा रहा है, जिसकी गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए हैं।
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों को जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। समिति का मानना है कि श्रद्धालुओं को शुद्ध और सुरक्षित प्रसाद उपलब्ध कराना प्राथमिक जिम्मेदारी है।
निधिवन मंदिर सेवा व्यवस्था पर भी फैसला
बैठक में निधिवन मंदिर की सेवा व्यवस्था से जुड़े विषय पर भी चर्चा हुई। जानकारी दी गई कि पूर्व से सेवा कार्य कर रहे सेवायत को ही दोबारा जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके लिए लगभग 13 करोड़ रुपये का टेंडर स्वीकृत हुआ है। बताया गया कि इस प्रक्रिया में केवल एक ही आवेदन प्राप्त हुआ था।
समिति ने स्पष्ट किया कि सेवा व्यवस्था को निर्धारित नियमों के अनुसार आगे बढ़ाया जाएगा और मंदिरों के संचालन में पारदर्शिता बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर रिपोर्ट पेश
मंदिर की इमारत और संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर भी बैठक में रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। पुरातत्व विभाग ने अपनी जांच में बताया कि मंदिर की सुरक्षा और स्थिरता को लेकर कोई गंभीर खतरा सामने नहीं आया है।
इसके अलावा आईआईटी रुड़की की विशेषज्ञ टीम द्वारा किए गए अध्ययन में भी ऐसी कोई आशंका व्यक्त नहीं की गई, जिससे मंदिर की संरचना पर तत्काल खतरे की स्थिति बनती हो। समिति ने कहा कि विभिन्न माध्यमों से प्रसारित कुछ आशंकाओं की पुष्टि आधिकारिक रिपोर्टों में नहीं हुई है।
ई-रिक्शा संचालन और यातायात व्यवस्था पर फोकस
मंदिर मार्गों पर बढ़ते यातायात दबाव और जाम की समस्या को देखते हुए ई-रिक्शा संचालन को व्यवस्थित करने का निर्णय लिया गया है। समिति के अनुसार, कई स्थानों पर मनमाने किराए की शिकायतें भी सामने आई हैं।
इस संबंध में परिवहन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किराया निर्धारित कर उसे वाहनों पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित कराया जाए। साथ ही संचालन व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
अतिक्रमण हटाने की दिशा में कार्रवाई
बांके बिहारी मंदिर मार्ग और आसपास के प्रमुख धार्मिक स्थलों के आसपास बढ़ते अतिक्रमण पर भी समिति ने चिंता जताई। अधिकारियों को सड़क और फुटपाथों को अतिक्रमणमुक्त कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को आने-जाने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
समिति ने यह भी बताया कि मंदिर क्षेत्र के व्यापारियों के साथ संवाद स्थापित करने की योजना बनाई गई है। इसी क्रम में स्थानीय व्यापारियों के साथ बैठक आयोजित कर उनकी समस्याओं और सुझावों पर चर्चा की जाएगी।