उत्तर प्रदेश

BorderSecurity – अवैध प्रवेश मामले में दो चीनी नागरिकों को मिली सजा

BorderSecurity – उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में भारत-नेपाल सीमा से जुड़े एक मामले में अदालत ने दो चीनी नागरिकों को दोषी ठहराते हुए कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। दोनों नागरिकों को वैध यात्रा दस्तावेजों के बिना भारतीय सीमा में प्रवेश करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

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मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद दोनों आरोपियों को दो वर्ष और 15 दिन की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक पर 15 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया है।

सीमा पर हुई थी गिरफ्तारी

यह मामला वर्ष 2024 का है, जब सिद्धार्थनगर जिले के ककरहवा सीमा क्षेत्र में सुरक्षा जांच के दौरान दो विदेशी नागरिकों को हिरासत में लिया गया था। पुलिस के अनुसार, दोनों नेपाल की ओर से भारतीय क्षेत्र में प्रवेश कर रहे थे।

संदेह होने पर सुरक्षा कर्मियों ने उनसे यात्रा संबंधी दस्तावेज मांगे। जांच के दौरान आवश्यक वैध वीजा और अन्य अनुमति दस्तावेज उपलब्ध नहीं पाए गए, जिसके बाद दोनों को पूछताछ के लिए रोका गया।

पूछताछ में सामने आई जानकारी

प्रारंभिक पूछताछ के दौरान दोनों विदेशी नागरिकों ने अपनी पहचान चीनी नागरिक के रूप में बताई। अधिकारियों को दिए गए विवरण के अनुसार, वे चीन के विभिन्न पते से संबंधित थे और सीमा पार करने के समय उनके पास भारत में प्रवेश के लिए आवश्यक वैध अनुमति नहीं थी।

जांच एजेंसियों ने दस्तावेजों की पुष्टि करने के बाद पाया कि भारतीय सीमा में प्रवेश के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया था। इसके बाद मामले में विधिक कार्रवाई शुरू की गई।

विदेशी अधिनियम के तहत दर्ज हुआ मामला

पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ विदेशी अधिनियम, 1946 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

अधिकारियों का कहना है कि सीमा सुरक्षा और वैध दस्तावेजों की जांच राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। इसी कारण ऐसे मामलों में निर्धारित कानूनों के तहत कार्रवाई की जाती है।

अदालत ने सुनाया फैसला

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने जांच से जुड़े दस्तावेज और साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। उपलब्ध तथ्यों और रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी माना।

फैसले में अदालत ने प्रत्येक आरोपी को दो वर्ष और 15 दिन के कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा दोनों पर 15-15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। न्यायालय ने यह फैसला संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत सुनाया।

सीमा सुरक्षा को लेकर सतर्कता

भारत-नेपाल सीमा से जुड़े क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी बनाए रखती हैं। सीमा पार आवागमन के दौरान दस्तावेजों की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया नियमित रूप से की जाती है ताकि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को रोका जा सके।

अधिकारियों के अनुसार, वैध पासपोर्ट और वीजा के बिना किसी भी विदेशी नागरिक का प्रवेश कानून के दायरे में आता है और ऐसे मामलों में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। हालिया फैसला भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।

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