उत्तर प्रदेश

CancerResearch – बीएचयू के शोध से यूरिन जांच में कैंसर पहचान संभव

CancerResearch – काशी हिंदू विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने कैंसर की पहचान को लेकर एक महत्वपूर्ण शोध उपलब्धि हासिल की है। अब तक जिन जांचों के लिए महंगे स्कैन और जटिल प्रक्रियाओं की जरूरत पड़ती थी, भविष्य में उनकी जगह केवल यूरिन सैंपल के जरिए कैंसर का पता लगाने की संभावना बढ़ गई है। बीएचयू के शोधकर्ताओं ने ऐसे विशेष माइक्रोआरएनए की पहचान की है, जो कैंसर की मौजूदगी और उसकी स्थिति के बारे में संकेत दे सकते हैं।

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यह शोध विशेष रूप से यूरिनरी ब्लैडर कैंसर यानी मूत्राशय कैंसर की पहचान को आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि भविष्य में इस तकनीक के आधार पर प्रेगनेंसी टेस्ट किट जैसी सरल जांच प्रणाली विकसित की जा सकती है।

महंगी जांचों का मिल सकता है विकल्प

फिलहाल ब्लैडर कैंसर की पहचान के लिए मरीजों को एमआरआई, सीटी स्कैन और सिस्टोस्कॉपी जैसी जांचों से गुजरना पड़ता है। इन परीक्षणों पर हजारों रुपये खर्च होते हैं और कई बार परिणाम पूरी तरह स्पष्ट नहीं होते। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए बीएचयू के विज्ञान संस्थान और चिकित्सा विज्ञान संस्थान के विशेषज्ञों ने संयुक्त शोध शुरू किया था।

शोध के दौरान कैंसर मरीजों और स्वस्थ लोगों के यूरिन नमूनों का विश्लेषण किया गया। वैज्ञानिकों ने आधुनिक नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग तकनीक का उपयोग कर दोनों समूहों में मौजूद माइक्रोआरएनए के स्तर और उनकी विविधता का अध्ययन किया।

माइक्रोआरएनए से मिले महत्वपूर्ण संकेत

अध्ययन में पाया गया कि कैंसर से प्रभावित मरीजों के यूरिन में कुछ विशेष माइक्रोआरएनए की मात्रा सामान्य लोगों की तुलना में अधिक थी। शोधकर्ताओं के अनुसार, ट्यूमर की स्थिति और उसके बढ़ने के साथ इन बायोमार्कर के स्तर में भी बदलाव दिखाई देता है।

इससे यह संभावना मजबूत हुई है कि माइक्रोआरएनए न केवल कैंसर की शुरुआती पहचान में सहायक हो सकते हैं, बल्कि बीमारी की गंभीरता और उसकी अवस्था का भी संकेत दे सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे इलाज की रणनीति तय करने में भी मदद मिल सकती है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित हुआ शोध

बीएचयू के वैज्ञानिकों का यह अध्ययन अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका नेचर स्प्रिंगर में प्रकाशित हुआ है। शोध टीम में जैव प्रौद्योगिकी विभाग और यूरोलॉजी विभाग के कई विशेषज्ञ शामिल रहे। वैज्ञानिकों ने बताया कि शोध के दौरान तीन माइक्रोआरएनए के एक विशेष संयोजन ने 90 प्रतिशत से अधिक संवेदनशीलता दिखाई।

प्रमुख शोधकर्ता डॉ. समरेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि केवल यूरिन सैंपल के जरिए कैंसर की पहचान भविष्य में मरीजों के लिए जांच प्रक्रिया को अधिक आसान और कम खर्चीला बना सकती है। उन्होंने बताया कि यह तकनीक कैंसर की प्रगति को समझने में भी उपयोगी साबित हो सकती है।

कम खर्च में जांच की संभावना

विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में जहां ब्लैडर कैंसर की जांच में आठ से दस हजार रुपये तक का खर्च आता है, वहीं भविष्य में माइक्रोआरएनए आधारित परीक्षण के जरिए यह खर्च काफी कम हो सकता है। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक, जांच की लागत कुछ सौ रुपये तक सीमित रह सकती है।

यूरोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. ललित कुमार ने कहा कि यह शोध कैंसर निदान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। हालांकि इसे व्यापक स्तर पर लागू करने से पहले बड़े पैमाने पर और अध्ययन किए जाने की आवश्यकता होगी।

भविष्य में क्लिनिकल उपयोग की तैयारी

शोधकर्ताओं का कहना है कि अब इस तकनीक को बड़े स्तर पर परीक्षण और क्लिनिकल उपयोग के लिए विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा। यदि आगे के परीक्षण सफल रहते हैं, तो यह तकनीक कैंसर की शुरुआती पहचान और निगरानी के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है।

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