उत्तर प्रदेश

Crime Verdict – 16 साल पुराने किसान हत्याकांड में दो दोषियों को मिली फांसी की सजा

Crime Verdict – उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में करीब 16 वर्ष पहले प्रधानी चुनाव से उपजी पुरानी रंजिश में हुई किसान की हत्या के मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एफटीसी-3) रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने दो आरोपियों को दोषी करार देते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोनों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इस हत्याकांड से जुड़े दो अन्य आरोपी पहले ही पुलिस मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं।

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घटना की जांच में सामने आए थे चार आरोपी

अभियोजन पक्ष के अनुसार, तितावी थाना क्षेत्र के गांव मांडी निवासी प्रदीप ने वर्ष 2010 में पुलिस को शिकायत देकर बताया था कि वह खेत में गन्ने की फसल का काम कर रहा था, जबकि उसके पिता राजबीर सिंह पास ही खेत में मौजूद थे। इसी दौरान गोली चलने की आवाज सुनाई दी। मौके पर पहुंचने पर उन्होंने अपने पिता को खून से लथपथ पाया। जांच के दौरान पुलिस ने गांव के सहदेव उर्फ पप्पू और प्रमोद के अलावा अमित तथा विपिन शर्मा की संलिप्तता का खुलासा किया। बाद में चारों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई।

दो आरोपी एनकाउंटर में मारे गए, दो पर चला मुकदमा

जांच के बाद सहदेव उर्फ पप्पू और प्रमोद के विरुद्ध पुलिस ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। वहीं, मामले से जुड़े अमित और विपिन शर्मा वर्ष 2011 में शाहपुर क्षेत्र में पुलिस मुठभेड़ के दौरान मारे गए थे। इसके बाद शेष दोनों आरोपियों के खिलाफ अदालत में सुनवाई जारी रही और उपलब्ध साक्ष्यों तथा गवाहों के आधार पर अदालत ने उन्हें दोषी माना।

अदालत ने अपराध की गंभीरता को माना निर्णायक

सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि जिस समय यह घटना हुई थी, उस दौर में जिले में संगठित अपराध और सुपारी देकर हत्या कराने जैसी घटनाएं गंभीर चुनौती बनी हुई थीं। अभियोजन ने यह भी कहा कि बाद के वर्षों में प्रशासन ने अपराधियों के खिलाफ एनकाउंटर, संपत्ति जब्ती और अन्य कानूनी कार्रवाइयों के जरिए कानून व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कई कदम उठाए। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और अपराध की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए दोनों दोषियों को मृत्युदंड देने का फैसला सुनाया।

सुनवाई में जिले के अपराध इतिहास का भी हुआ उल्लेख

सरकारी अधिवक्ताओं ने बहस के दौरान जिले में अतीत में हुई चर्चित आपराधिक घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उस समय सक्रिय गैंगों और पेशेवर शूटरों का प्रभाव कानून व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती था। इसी संदर्भ में जिले की पृष्ठभूमि पर आधारित वेब सीरीज ‘भौकाल’ का भी उल्लेख किया गया। हालांकि अदालत का निर्णय मुख्य रूप से इस मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों और कानूनी तथ्यों पर आधारित रहा।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बढ़ाई मामले की गंभीरता

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, किसान राजबीर सिंह के शरीर पर कुल सात गोली लगने के निशान मिले थे, जिनमें पांच प्रवेश और दो निकास घाव शामिल थे। जांच में तीन गोलियां शरीर के भीतर मिली थीं। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि किसी व्यक्ति की हत्या एक गोली से भी संभव है, लेकिन इस मामले में कई गोलियां शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर दागी गईं, जो अपराध की अत्यधिक क्रूरता को दर्शाता है। इसी आधार पर अदालत ने इसे दुर्लभतम श्रेणी का मामला मानते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई।

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