DefenseExports – कानपुर में बने सैन्य पैराशूटों को मिली वैश्विक पहचान
DefenseExports – उत्तर प्रदेश के कानपुर में विकसित स्वदेशी सैन्य पैराशूट अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। हाल ही में शिलांग में आयोजित एक रक्षा उपकरण प्रदर्शनी के दौरान कई देशों के सैन्य अधिकारियों ने भारतीय रक्षा उत्पादों में गहरी रुचि दिखाई। विशेष रूप से कानपुर स्थित उत्पादन इकाइयों में तैयार किए गए आधुनिक पैराशूट सिस्टम विदेशी प्रतिनिधियों के आकर्षण का केंद्र बने रहे।

रक्षा क्षेत्र की सार्वजनिक कंपनी ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड (जीआईएल) ने इस प्रदर्शनी में अपने विभिन्न स्वदेशी उत्पादों का प्रदर्शन किया। आयोजन में भाग लेने वाले मित्र देशों के सैन्य अधिकारियों ने इन तकनीकों की कार्यक्षमता और उपयोगिता को करीब से देखा तथा उनसे संबंधित जानकारी प्राप्त की।
सैन्य प्रतिनिधियों ने दिखाई विशेष दिलचस्पी
प्रदर्शनी के दौरान कई देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने भारतीय रक्षा उपकरणों का अवलोकन किया। जीआईएल द्वारा प्रदर्शित पैराशूट प्रणालियों में लड़ाकू विमानों से जुड़े विशेष पैराशूट, सामरिक अभियानों में उपयोग होने वाले पैराशूट और अन्य सैन्य जरूरतों के लिए विकसित उपकरण शामिल थे।
कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, विदेशी प्रतिनिधियों ने इन उत्पादों की तकनीकी विशेषताओं और संचालन क्षमता के बारे में विस्तार से जानकारी ली। कुछ देशों के प्रतिनिधियों ने इन्हें अपने सैन्य ढांचे में शामिल करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की।
प्रदर्शनी में आकर्षण का केंद्र बने स्वदेशी उत्पाद
शिलांग में आयोजित इस रक्षा प्रदर्शनी में भारतीय रक्षा उद्योग की कई कंपनियों ने हिस्सा लिया। ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड के स्टॉल पर बड़ी संख्या में सैन्य प्रतिनिधि पहुंचे। यहां विभिन्न प्रकार के पैराशूट सिस्टम, विशेष सैन्य उपकरण और बहुउद्देशीय उत्पाद प्रदर्शित किए गए।
कंपनी का कहना है कि स्वदेशी तकनीक पर आधारित इन उत्पादों को आधुनिक सैन्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। यही वजह है कि इन्हें अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।
कई देशों के अधिकारियों ने की चर्चा
प्रदर्शनी में एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र के कई मित्र देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें श्रीलंका, वियतनाम, नेपाल, भूटान, मालदीव, मलेशिया, फिलीपींस, म्यांमार, कंबोडिया और सेशेल्स जैसे देशों के सैन्य अधिकारी शामिल रहे।
अधिकारियों के अनुसार, इन देशों के प्रतिनिधियों ने भारतीय रक्षा उत्पादों के प्रदर्शन और उनकी क्षमताओं को लेकर रुचि दिखाई। कुछ देशों द्वारा पहले से भारतीय सैन्य उपकरणों के उपयोग का भी उल्लेख किया गया।
निर्यात संभावनाओं को मिल सकता है बल
ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड के अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से भारतीय रक्षा उद्योग को नए अवसर मिलते हैं। कंपनी के अनुसार, कुछ देशों की सेनाएं पहले से भारतीय पैराशूट प्रणालियों का उपयोग कर रही हैं और भविष्य में सहयोग का दायरा बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत के प्रयासों से घरेलू कंपनियों की पहचान वैश्विक स्तर पर मजबूत हो रही है। इससे रक्षा निर्यात को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।
आधुनिक तकनीक वाले पैराशूट पर बढ़ा ध्यान
प्रदर्शनी में जिन उत्पादों ने सबसे अधिक ध्यान आकर्षित किया, उनमें सामरिक अभियानों के लिए विकसित आधुनिक पैराशूट सिस्टम शामिल रहे। इनका उपयोग सैनिकों की सुरक्षित हवाई तैनाती और विशेष सैन्य अभियानों में किया जाता है।
रक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों के अनुसार, उन्नत तकनीक और बेहतर सुरक्षा विशेषताओं के कारण ऐसे उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। भारतीय रक्षा उद्योग अब इस क्षेत्र में अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी कर रहा है।