GorakhpurElection – शाहपुर वार्ड की भाजपा पार्षद का निर्वाचन अदालत ने किया निरस्त
GorakhpurElection- गोरखपुर नगर निगम के वार्ड संख्या 43 (शाहपुर) से निर्वाचित भाजपा पार्षद ज्ञानती देवी का निर्वाचन अदालत ने निरस्त कर दिया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) ने अपने आदेश में उनके नामांकन और निर्वाचन को उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत अवैध घोषित किया। अदालत ने आदेश की प्रति आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी को भी भेज दी है। जिला निर्वाचन अधिकारी दीपक मीणा ने कहा कि आदेश का विस्तृत अध्ययन करने के बाद नियमानुसार आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

वर्ष 2023 के चुनाव से जुड़ा है मामला
यह विवाद वर्ष 2023 के नगर निकाय चुनाव से जुड़ा है। उस समय शाहपुर वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित था और भाजपा ने ज्ञानती देवी को उम्मीदवार बनाया था। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद आम आदमी पार्टी की प्रत्याशी अर्चना शुक्ला ने जिला न्यायालय में निर्वाचन याचिका दायर कर परिणाम को चुनौती दी। बाद में यह मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट को स्थानांतरित किया गया, जहां दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुनाया।
नामांकन से जुड़े बिंदुओं पर उठे सवाल
याचिका में आरोप लगाया गया था कि नामांकन पत्र और शपथ पत्र में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां सही ढंग से प्रस्तुत नहीं की गईं। विशेष रूप से भाजपा के अधिकृत चुनाव चिह्न और प्रत्याशी के नाम में पति के नाम से जुड़े अंतर को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई थी। सुनवाई के दौरान तत्कालीन भाजपा महानगर अध्यक्ष का शपथ पत्र भी पेश किया गया, जिसमें ज्ञानती देवी को पार्टी की अधिकृत उम्मीदवार बताया गया। हालांकि, अदालत के समक्ष प्रस्तुत अभिलेखों के आधार पर फैसला सुनाया गया।
हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी
फैसले के बाद ज्ञानती देवी के पुत्र चंद्रशेखर सिंह ने कहा कि यह मामला केवल नाम से जुड़ी तकनीकी त्रुटि का है और चुनाव पूरी पारदर्शिता के साथ लड़ा गया था। उन्होंने कहा कि परिवार न्यायपालिका का सम्मान करता है और अब इस निर्णय को उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी। उनका विश्वास है कि आगे की कानूनी प्रक्रिया में उनका पक्ष सुना जाएगा।
याचिकाकर्ता ने फैसले का किया स्वागत
याचिकाकर्ता अर्चना शुक्ला ने अदालत के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि उन्होंने नामांकन प्रक्रिया के समय ही संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपने दस्तावेज और आपत्तियां प्रस्तुत की थीं। कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उनके अनुसार अदालत का फैसला तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आया है।
विकास कार्य और आगे की प्रक्रिया
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार शाहपुर वार्ड में चल रही लगभग ₹6.63 करोड़ की विकास परियोजनाओं पर इस फैसले का तत्काल कोई असर नहीं पड़ेगा। जिन कार्यों के लिए धनराशि जारी हो चुकी है और एजेंसियों का चयन किया जा चुका है, वे नियमानुसार जारी रहेंगे। वहीं जिला निर्वाचन कार्यालय ने बताया कि अदालत के आदेश के अनुरूप पद रिक्त होने की सूचना स्थानीय निकाय निदेशालय को भेजी जाएगी। इसके बाद निर्वाचन आयोग आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर उपचुनाव कराने पर निर्णय लेगा।