उत्तर प्रदेश

HealthScam – कानपुर में किडनी-लिवर ट्रांसप्लांट रैकेट का हुआ बड़ा खुलासा

HealthScam – कानपुर में अवैध अंग प्रत्यारोपण के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जहां किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट के नाम पर संगठित तरीके से करोड़ों का खेल चल रहा था। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त कार्रवाई में सामने आया कि शहर के एक निजी अस्पताल को इस पूरे रैकेट का केंद्र बनाया गया था। इस मामले में एक डॉक्टर दंपति और एक बिचौलिए को हिरासत में लिया गया है, जबकि अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।

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कई अस्पतालों के जरिए चल रहा था नेटवर्क

प्रारंभिक जांच में पता चला है कि यह पूरा ऑपरेशन एक ही अस्पताल तक सीमित नहीं था, बल्कि तीन अलग-अलग अस्पतालों के बीच सुनियोजित तरीके से काम किया जा रहा था। एक जगह सर्जरी की जाती थी, जबकि दूसरे अस्पतालों में डोनर और मरीजों को अलग-अलग रखा जाता था। इससे पूरे मामले को छिपाने की कोशिश की जाती थी।

मोटी रकम लेकर तैयार किए जाते थे डोनर

सूत्रों के अनुसार, इस रैकेट में गरीब और जरूरतमंद लोगों को पैसे का लालच देकर डोनर बनाया जाता था। उन्हें कुछ लाख रुपये देने का वादा किया जाता, जबकि मरीजों से ट्रांसप्लांट के नाम पर कई गुना अधिक रकम वसूली जाती थी। शुरुआती जानकारी में सामने आया है कि एक मामले में डोनर को आंशिक भुगतान डिजिटल माध्यम से और बाकी नकद दिया गया।

बाहरी डॉक्टरों की भूमिका भी जांच के घेरे में

जांच एजेंसियों को यह भी संकेत मिले हैं कि ट्रांसप्लांट प्रक्रिया में दूसरे शहरों से डॉक्टरों को बुलाया जाता था। दिल्ली और लखनऊ से जुड़े कुछ चिकित्सकों से पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह नेटवर्क सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं, बल्कि कई राज्यों तक फैला हो सकता है।

गुप्त सूचना के बाद शुरू हुई कार्रवाई

इस पूरे मामले का खुलासा एक अहम इनपुट के बाद हुआ, जिसमें कुछ संदिग्ध मेडिकल जांचों की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद पुलिस और विशेष टीमों ने करीब तीन हफ्तों तक निगरानी रखी और पुख्ता सबूत मिलने पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान कई लोगों को हिरासत में लिया गया और महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जब्त किए गए।

मरीज और डोनर को रखा गया निगरानी में

पुलिस ने एक डोनर और एक महिला मरीज को भी सुरक्षा में लिया है, जिनका इलाज जारी है। इनसे पूछताछ के जरिए रैकेट के काम करने के तरीके को समझने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, इन दोनों की भूमिका और उनके बीच संबंधों की भी जांच की जा रही है।

नियमों की अनदेखी ने बढ़ाई चिंता

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने स्वीकार किया कि इस तरह की गतिविधियां गंभीर लापरवाही और नियमों के उल्लंघन का संकेत हैं। अंग प्रत्यारोपण जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में पारदर्शिता और सख्त निगरानी जरूरी होती है, लेकिन यहां कई स्तरों पर खामियां सामने आई हैं।

राष्ट्रीय स्तर तक फैलने की आशंका

प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह गिरोह अलग-अलग राज्यों में सक्रिय हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए विशेष टीमें अन्य शहरों में भी जांच के लिए भेजी गई हैं। आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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