उत्तर प्रदेश

KidneyRacket – मेरठ के अस्पताल में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट का हुआ खुलासा

KidneyRacket – उत्तर प्रदेश में सामने आए किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़े मामले में जांच के दौरान एक और बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस पूछताछ में यह सामने आया है कि मेरठ के एक निजी अस्पताल में अवैध तरीके से कई किडनी ट्रांसप्लांट किए गए थे। यह जानकारी एक ऑपरेशन थिएटर तकनीशियन से पूछताछ के दौरान मिली, जो फिलहाल जेल में है। अधिकारियों के अनुसार, यह घटनाएं वर्ष 2022 से 2023 के बीच हुई थीं और इसमें कई लोगों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है।

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फरार आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस

मामले में शामिल बताए जा रहे कुछ प्रमुख आरोपी फिलहाल फरार हैं। इनमें अस्पताल से जुड़े कुछ चिकित्सक और उनके सहयोगी शामिल बताए गए हैं। पुलिस टीम लगातार अलग-अलग शहरों में दबिश देकर उनकी तलाश कर रही है। जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपी लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे हैं, जिससे उन्हें पकड़ना चुनौतीपूर्ण हो गया है। इस पूरे नेटवर्क को लेकर कई स्तरों पर जांच जारी है।

अन्य अस्पतालों के नाम भी आए सामने

जांच के दौरान यह भी जानकारी सामने आई है कि केवल एक अस्पताल ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य निजी अस्पतालों में भी इसी तरह की गतिविधियां हुई थीं। इन स्थानों पर भी अवैध ट्रांसप्लांट किए जाने की आशंका जताई जा रही है। इस मामले में पहले ही कई लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जिनमें डॉक्टर और अन्य सहयोगी शामिल हैं। पुलिस का मानना है कि यह एक संगठित गिरोह के रूप में काम कर रहा था।

आगे की पूछताछ से मिल सकते हैं और सुराग

पुलिस अब मामले में और जानकारी जुटाने के लिए अन्य आरोपियों से पूछताछ की तैयारी कर रही है। हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाले एक आरोपी को रिमांड पर लेने की प्रक्रिया चल रही है। अधिकारियों का कहना है कि आमने-सामने पूछताछ से कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं, जिससे पूरे नेटवर्क का खुलासा संभव होगा।

तकनीशियन की भूमिका पर जांच जारी

जेल में बंद तकनीशियन की भूमिका भी जांच के दायरे में है। पुलिस के अनुसार, वह इस पूरे नेटवर्क के बारे में काफी जानकारी रखता है, लेकिन अभी तक पूरी तरह सहयोग नहीं कर रहा है। उसके बयान के आधार पर ही मेरठ के अस्पताल का नाम सामने आया है। जांच एजेंसियां उससे जुड़े अन्य लोगों और संपर्कों की भी पड़ताल कर रही हैं।

सबूत जुटाने में आ रही चुनौतियां

जांच के दौरान कुछ तकनीकी अड़चनें भी सामने आ रही हैं। पुलिस को अब तक मुख्य आरोपी का मोबाइल फोन नहीं मिल पाया है, जिससे कई अहम जानकारियां मिल सकती थीं। बताया जा रहा है कि फोन को नष्ट कर दिया गया है, जिसके चलते डिजिटल सबूत जुटाने में दिक्कत हो रही है। इसके बावजूद पुलिस अन्य तरीकों से मामले की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है।

नेटवर्क से जुड़े लोगों पर नजर

जांच एजेंसियां अब आरोपियों के करीबी संपर्कों और सहयोगियों की तलाश में जुटी हैं। पुलिस का मानना है कि इस नेटवर्क में कई स्तरों पर लोग शामिल हो सकते हैं, जिनकी पहचान धीरे-धीरे सामने आएगी। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में सभी दोषियों को कानून के दायरे में लाने के लिए कार्रवाई जारी रहेगी।

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