उत्तर प्रदेश

LaborReform – यूपी में नए श्रम नियमों से बदलेगी कार्यस्थलों की व्यवस्था

LaborReform – उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रमिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियों को बेहतर बनाने के उद्देश्य से नई श्रम नियमावली का मसौदा जारी किया है। ‘उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशा नियमावली 2026’ के तहत राज्य के सभी प्रतिष्ठानों को ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा। खासतौर पर वे संस्थान जहां 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, उन्हें इस व्यवस्था का पालन करना होगा। इस कदम के लागू होने के बाद प्रदेश में अब तक लागू कई पुराने श्रम नियम स्वतः समाप्त हो जाएंगे और उनकी जगह एकीकृत व्यवस्था लागू होगी।

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ऑनलाइन पंजीकरण और सख्त समयसीमा

नई नियमावली के तहत सभी कारखानों, निर्माण स्थलों और अन्य संस्थानों को तय समय के भीतर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा। यदि कोई प्रतिष्ठान निर्धारित समय सीमा का पालन नहीं करता है, तो उसे विलंब शुल्क के रूप में अतिरिक्त भुगतान करना पड़ेगा।

इसके साथ ही संस्थानों को अपने सभी विवरण संबंधित पोर्टल पर अद्यतन रखने होंगे। किसी भी प्रकार के बदलाव की जानकारी 30 दिनों के भीतर देना अनिवार्य किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और निगरानी व्यवस्था मजबूत होगी।

नियोक्ताओं की जिम्मेदारी हुई तय

इस नियमावली में नियोक्ताओं के दायित्वों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। कार्यस्थल पर मशीनों और उपकरणों को सुरक्षित रखना अब अनिवार्य होगा, ताकि दुर्घटनाओं की संभावना कम की जा सके।

लगातार चलने वाली मशीनों या कन्वेयर बेल्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए कार्य अवधि और कार्य गति निर्धारित करने का प्रावधान किया गया है। इसके लिए संबंधित प्राधिकरण से अनुमति लेना आवश्यक होगा, जिससे श्रमिकों पर अत्यधिक दबाव न पड़े।

स्वास्थ्य जांच और सुरक्षा प्रशिक्षण पर जोर

नई व्यवस्था में कर्मचारियों के स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दी गई है। 45 वर्ष से अधिक आयु के कर्मचारियों के लिए वार्षिक स्वास्थ्य परीक्षण अनिवार्य किया गया है। वहीं, खतरनाक उद्योगों में काम करने वाले कर्मियों के लिए विशेष चिकित्सा जांच की व्यवस्था भी जोड़ी गई है।

इसके अलावा, पांच मंजिल या 20 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले प्रतिष्ठानों में आपातकालीन योजना तैयार करना और कर्मचारियों को नियमित सुरक्षा प्रशिक्षण देना जरूरी होगा। यह कदम संभावित हादसों से निपटने की तैयारी को मजबूत करेगा।

नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता

नियमावली के तहत प्रत्येक कर्मचारी को काम शुरू करने से पहले नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही एक महीने के भीतर पहचान पत्र जारी करना भी जरूरी होगा।

यदि किसी कार्यस्थल पर दुर्घटना या मृत्यु की घटना होती है, तो नियोक्ता को इसकी जानकारी तुरंत ऑनलाइन माध्यम से संबंधित विभाग को देनी होगी। यह प्रावधान जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पुराने नियमों की जगह नई व्यवस्था

नई नियमावली लागू होने के बाद कई पुराने श्रम कानून समाप्त कर दिए जाएंगे। इनमें संविदा श्रम, अंतरराज्यीय प्रवासी कामगार, बीड़ी और सिगार श्रमिक, कारखाना नियम और भवन निर्माण कर्मकार से जुड़े नियम शामिल हैं।

सरकार ने मसौदे पर 45 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। इसके बाद अंतिम रूप देकर इसे लागू किया जाएगा। माना जा रहा है कि यह बदलाव राज्य में श्रम सुधारों को नई दिशा देगा और कार्यस्थलों को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाएगा।

कर्मचारियों की संख्या के अनुसार शुल्क तय

ऑनलाइन पंजीकरण के लिए कर्मचारियों की संख्या के आधार पर शुल्क निर्धारित किया गया है। छोटे प्रतिष्ठानों के लिए शुल्क कम रखा गया है, जबकि बड़े संस्थानों को अधिक राशि देनी होगी।

इस व्यवस्था का उद्देश्य सभी स्तर के व्यवसायों को एक समान ढांचे में लाना है, ताकि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके और औद्योगिक माहौल को बेहतर बनाया जा सके।

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