MedicalNegligence – कानपुर में महिला का कटा हाथ थाने के मालखाने में सुरक्षित
MedicalNegligence – कानपुर में एक महिला का ऑपरेशन के दौरान काटा गया हाथ पिछले छह दिनों से रेल बाजार थाने के मालखाने में रखा हुआ है। मामले ने अब प्रशासनिक और चिकित्सीय प्रक्रियाओं पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन कटे हुए अंग को आगे जांच के लिए भेजने को लेकर अभी तक अंतिम फैसला नहीं लिया जा सका है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी के निर्देश मिलने के बाद ही अगली कार्रवाई की जाएगी।

इलाज के दौरान बिगड़ी स्थिति
महाराजपुर स्थित आईटीबीपी की 32वीं वाहिनी में तैनात जवान विकास सिंह की मां निर्मला देवी की तबीयत 13 मई को अचानक खराब हो गई थी। सांस लेने में दिक्कत और हृदय संबंधी परेशानी के चलते उन्हें पहले कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। परिवार के अनुसार इलाज के दौरान उनकी हालत में कुछ सुधार तो हुआ, लेकिन इसी बीच उनका दाहिना हाथ काला पड़ने लगा। स्थिति गंभीर होने पर उन्हें दूसरे निजी अस्पताल पारस हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने 17 मई को हाथ काटने का निर्णय लिया।
कटे अंग को परिवार को सौंपने पर उठे सवाल
ऑपरेशन के बाद अस्पताल प्रशासन ने महिला का कटा हुआ हाथ परिजनों को सौंप दिया। यही मामला अब विवाद का मुख्य कारण बना हुआ है। चिकित्सा नियमों के अनुसार किसी भी कटे हुए अंग को जांच के लिए सुरक्षित रखने या बायोमेडिकल प्रक्रिया के तहत निस्तारित करने का प्रावधान होता है। ऐसे में हाथ को सीधे परिजनों को देने पर सवाल उठने लगे हैं।
पीड़ित पक्ष ने इस पूरे मामले को लेकर पहले स्थानीय पुलिस और बाद में उच्च अधिकारियों से शिकायत की थी। पुलिस आयुक्त के संज्ञान लेने के बाद 20 मई को हाथ को कब्जे में लेकर सील किया गया और उसे रेल बाजार थाने के मालखाने में रखवा दिया गया।
जांच के लिए आदेश का इंतजार
स्वास्थ्य विभाग की ओर से कटे हुए हाथ को हिस्टोपैथोलॉजी जांच के लिए मेडिकल कॉलेज भेजने की बात कही गई थी। हालांकि कई दिन बीतने के बावजूद यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। पुलिस का कहना है कि मेडिकल जांच से जुड़े निर्देश मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से मिलने के बाद ही अंग को आगे भेजा जाएगा।
रेल बाजार थाना पुलिस ने बताया कि मामला संवेदनशील है और सभी कार्रवाई नियमानुसार की जा रही है। अधिकारियों के निर्देश मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया तय होगी।
अस्पताल प्रबंधन ने दी सफाई
मामले के सामने आने के बाद पारस हॉस्पिटल की ओर से आधिकारिक बयान भी जारी किया गया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीज के परिजनों की लिखित सहमति के बाद ही ऑपरेशन किया गया था। अस्पताल के मुताबिक पूरी प्रक्रिया निर्धारित मेडिकल प्रोटोकॉल के अनुसार अपनाई गई और मरीज की हालत फिलहाल स्थिर है।
अस्पताल ने यह भी कहा कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रहा है और मामले की जांच जारी रहने तक आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएंगे।
पुलिस ने जुटाए दस्तावेज और फुटेज
दोनों निजी अस्पतालों के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। जांच टीम ने अस्पताल पहुंचकर इलाज से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज एकत्र किए हैं। सूत्रों के मुताबिक अस्पतालों के सीसीटीवी फुटेज भी सुरक्षित कर लिए गए हैं।
पुलिस अब उन डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के बयान दर्ज करने की तैयारी में है जो महिला के इलाज में शामिल थे। जांच का फोकस इस बात पर है कि कहीं इलाज में लापरवाही तो नहीं हुई और कटे हुए अंग को परिवार को सौंपने का फैसला किन परिस्थितियों में लिया गया।