SnakeBite – यूपी में सर्पदंश की दो घटनाओं ने बढ़ाई चिंता, छात्र की मौत से आक्रोश
SnakeBite– उत्तर प्रदेश में सर्पदंश की दो अलग-अलग घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बागपत जिले में एक ही परिवार के सदस्यों को बार-बार सांप के काटने की घटनाएं सामने आई हैं, जबकि बाराबंकी में प्राथमिक विद्यालय के एक छात्र की सर्पदंश के बाद मौत हो गई। दोनों मामलों में स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका भी चर्चा का विषय बनी हुई है। संबंधित जिलों में पुलिस और प्रशासन ने घटनाओं की जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है।

बागपत में एक सप्ताह में दूसरी बार युवती को सांप ने काटा
बागपत के बिनौली गांव निवासी विनोद वाल्मीकि के परिवार के अनुसार, सोमवार शाम उनकी बेटी खुशी घर के बाहर बने शौचालय की ओर गई थी। इसी दौरान उसे सांप ने पैर में काट लिया। युवती की चीख सुनकर परिजन मौके पर पहुंचे और तत्काल उसे बिनौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए मेरठ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
परिजनों का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले 22 जुलाई को भी खुशी को घर में काम करते समय सांप ने डस लिया था। उस समय भी उसे पहले जिला अस्पताल और बाद में मेरठ मेडिकल कॉलेज भेजा गया था। परिवार के अनुसार, खुशी के भाई राजा को भी पिछले एक महीने के दौरान पांच बार सर्पदंश का सामना करना पड़ा है। लगातार हो रही इन घटनाओं के कारण परिवार भय और तनाव के माहौल में रह रहा है।
लगातार घटनाओं से परिवार में बना हुआ है डर
परिवार का कहना है कि बार-बार सर्पदंश की घटनाओं के बाद सभी सदस्य विशेष सतर्कता बरत रहे हैं। रात के समय जागकर निगरानी की जा रही है और घर के आसपास सफाई रखने के साथ अन्य सावधानियां भी अपनाई जा रही हैं। स्थानीय लोग भी इस असामान्य स्थिति को लेकर चिंता जता रहे हैं। हालांकि, इन घटनाओं के पीछे किसी विशेष कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बाराबंकी में स्कूल परिसर में छात्र की मौत
उधर, बाराबंकी जिले के हैदरगढ़ क्षेत्र स्थित सहावर प्राथमिक विद्यालय में तीसरी कक्षा के सात वर्षीय छात्र अंशु की सर्पदंश के बाद मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि बच्चे को सांप ने विद्यालय परिसर में बने शौचालय के पास काटा था। उनका कहना है कि घटना की जानकारी समय पर परिवार तक नहीं पहुंचाई गई, जिससे इलाज शुरू होने में काफी देर हो गई। बाद में बच्चे को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
परिजनों ने लापरवाही का लगाया आरोप
घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल परिसर में प्रदर्शन करते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनका आरोप है कि यदि समय पर सूचना दी जाती और तत्काल उपचार शुरू कराया जाता तो बच्चे की जान बचाई जा सकती थी। प्रदर्शन के दौरान संबंधित शिक्षाकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई और मुकदमा दर्ज करने की मांग भी उठाई गई।
प्रशासन ने गठित की जांच समिति
घटना की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति में प्रशासन, पुलिस और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को शामिल किया गया है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भी बताया कि विद्यालय की परिस्थितियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी। फिलहाल दोनों मामलों में संबंधित विभाग अपने-अपने स्तर पर जांच और आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं।