उत्तर प्रदेश

TGTExamFraud – उत्तर प्रदेश में भर्ती परीक्षा के दौरान 11 संदिग्ध पकड़े गए

TGTExamFraud – उत्तर प्रदेश में चल रही प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (TGT) भर्ती परीक्षा के दौरान दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने के प्रयास का मामला सामने आया है। राज्य के विभिन्न जिलों में कुल 11 लोगों को संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर चिन्हित किया गया। इनमें से अधिकांश को मौके पर ही हिरासत में लिया गया, जबकि कुछ लोग जांच के दौरान फरार होने में सफल रहे। अधिकारियों के अनुसार, परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक और बायोमेट्रिक सत्यापन का व्यापक उपयोग किया गया था।

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परीक्षा कई विषयों के लिए दो पालियों में आयोजित की गई थी। इस दौरान लखनऊ, बरेली, चित्रकूट, जौनपुर, मिर्जापुर और हाथरस समेत कई जिलों से अनियमितताओं के मामले सामने आए।

एआई निगरानी और बायोमेट्रिक जांच से खुला मामला

परीक्षा की निगरानी आयोग के नियंत्रण कक्ष से की गई, जहां एआई आधारित कैमरों और डिजिटल सत्यापन प्रणालियों का उपयोग किया गया। अधिकारियों ने बताया कि सभी परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही थी।

जांच के दौरान कई केंद्रों पर बायोमेट्रिक डेटा और पहचान संबंधी विवरण मेल नहीं खाए। इसी आधार पर कुछ परीक्षार्थियों को रोका गया और उनकी पहचान की जांच की गई। विस्तृत सत्यापन के बाद कई मामलों में यह आशंका मजबूत हुई कि संबंधित व्यक्ति वास्तविक अभ्यर्थी नहीं थे।

लखनऊ और बरेली में सबसे अधिक मामले

राजधानी लखनऊ में विभिन्न परीक्षा केंद्रों से कई संदिग्ध परीक्षार्थियों को पकड़ा गया। अधिकारियों के अनुसार, बायोमेट्रिक मिलान में गड़बड़ी सामने आने के बाद उनकी जांच की गई।

बरेली में भी दो अलग-अलग केंद्रों पर पहचान संबंधी विसंगतियां सामने आईं। जांच के दौरान यह पाया गया कि कुछ लोग कथित तौर पर दूसरे उम्मीदवारों की जगह परीक्षा देने पहुंचे थे। इसके बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना दी गई और आवश्यक कार्रवाई शुरू की गई।

कथित सौदेबाजी की भी जांच

जांच एजेंसियों को पूछताछ के दौरान ऐसे संकेत मिले हैं कि कुछ मामलों में परीक्षा देने के लिए आर्थिक लेनदेन की व्यवस्था की गई थी। पुलिस के अनुसार, एक आरोपी ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसे दूसरे अभ्यर्थी के स्थान पर परीक्षा देने के लिए धनराशि देने का आश्वासन दिया गया था।

अधिकारियों का कहना है कि इन दावों की स्वतंत्र जांच की जा रही है और संबंधित दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों तथा संपर्क सूत्रों की पड़ताल की जा रही है। मामले में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों का सत्यापन किया जाएगा।

दस्तावेजों में हेरफेर की आशंका

कुछ मामलों में जांच एजेंसियों को पहचान पत्र और अन्य दस्तावेजों में संभावित छेड़छाड़ के संकेत भी मिले हैं। अधिकारियों के अनुसार, कुछ अभ्यर्थियों द्वारा प्रस्तुत पहचान दस्तावेजों और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड में अंतर पाया गया।

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय था। जांच के दौरान डिजिटल रिकॉर्ड और दस्तावेजों की भी बारीकी से समीक्षा की जा रही है।

पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस

पुलिस और परीक्षा से जुड़ी एजेंसियां अब इस पूरे मामले को व्यापक स्तर पर जांच रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि यदि संगठित रूप से किसी नेटवर्क ने परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की है, तो उससे जुड़े अन्य लोगों की भी पहचान की जाएगी।

प्रशासन ने कहा है कि भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी कारण तकनीकी निगरानी, बायोमेट्रिक सत्यापन और पहचान जांच की प्रक्रिया को और मजबूत किया जा रहा है ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

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