उत्तर प्रदेश

Weather – यूपी में कमजोर मानसून की आशंका, किसानों की चिंता बढ़ी

Weather – उत्तर प्रदेश में इस साल मानसून सामान्य से कमजोर रहने की संभावना जताई गई है, जिससे किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा दीर्घकालिक पूर्वानुमान के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान प्रदेश में औसत से कम बारिश हो सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि वैश्विक समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियों में बदलाव के कारण इस बार मानसूनी प्रणाली पूरी तरह सक्रिय नहीं दिख रही है, जो खेती के लिए चुनौती बन सकती है।

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अल नीनो की सक्रियता बनी बड़ी वजह

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार मानसून की कमजोरी के पीछे सबसे अहम कारण प्रशांत महासागर में बन रही अल नीनो की स्थिति है। पिछले कुछ वर्षों से ला नीना के प्रभाव से अच्छी वर्षा देखने को मिली थी, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। अनुमान है कि मानसून के मुख्य महीनों के दौरान अल नीनो सक्रिय हो सकता है, जिससे समुद्री सतह का तापमान बढ़ता है और मानसूनी हवाओं की नमी कम हो जाती है। इसका सीधा असर वर्षा की मात्रा पर पड़ता है और कई क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है।

कम बर्फबारी का असर भी पड़ेगा

विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि उत्तरी गोलार्द्ध में इस बार अपेक्षाकृत कम बर्फबारी हुई है, जिसका असर मानसून पर पड़ सकता है। यूरेशिया और आसपास के क्षेत्रों में सर्दियों के दौरान बर्फ का फैलाव मानसूनी दबाव तंत्र को प्रभावित करता है। जब बर्फ कम होती है, तो तापमान और वायुदाब में बदलाव आता है, जिससे मानसून की गति और दिशा प्रभावित होती है। यही कारण है कि इस साल बारिश का वितरण असमान रहने की आशंका जताई जा रही है।

हिंद महासागर की स्थिति भी पूरी तरह अनुकूल नहीं

हालांकि हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) के सकारात्मक होने की संभावना जताई जा रही है, जो आमतौर पर बारिश के लिए अनुकूल माना जाता है। लेकिन इस बार विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो का प्रभाव इतना मजबूत हो सकता है कि IOD के सकारात्मक असर को भी संतुलित कर दे। यानी, अगर IOD मददगार साबित भी होता है, तब भी कुल मिलाकर बारिश सामान्य स्तर तक नहीं पहुंच पाएगी।

खेती-किसानी पर बढ़ सकता है दबाव

प्रदेश की कृषि व्यवस्था मुख्य रूप से मानसून पर निर्भर है। धान, मक्का और गन्ने जैसी प्रमुख खरीफ फसलों के लिए समय पर पर्याप्त बारिश बेहद जरूरी होती है। ऐसे में यदि मानसून कमजोर रहता है, तो किसानों को सिंचाई के वैकल्पिक साधनों पर अधिक निर्भर होना पड़ेगा। इससे लागत बढ़ने के साथ-साथ उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। कृषि विशेषज्ञ किसानों को सलाह दे रहे हैं कि वे कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को अपनाने के साथ-साथ आधुनिक सिंचाई तकनीकों का उपयोग करें, ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके।

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