उत्तराखण्ड

Admission – उत्तराखंड में नर्सिंग कॉलेजों में अब परीक्षा से होगा दाखिला

Admission – उत्तराखंड में नर्सिंग और पैरामेडिकल कोर्सों में प्रवेश प्रक्रिया को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। अब राज्य के सरकारी और निजी दोनों तरह के कॉलेजों में दाखिला केवल लिखित परीक्षा और काउंसलिंग के आधार पर होगा। पहले निजी संस्थानों में आधी सीटों पर सीधे प्रवेश की व्यवस्था थी, लेकिन अब उसे समाप्त कर दिया गया है।

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राज्य सरकार के इस फैसले के बाद प्रवेश प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समान अवसर आधारित माना जा रहा है। लंबे समय से छात्र और अभिभावक सभी सीटों पर एक जैसी चयन प्रक्रिया लागू करने की मांग उठा रहे थे।

पहले अलग-अलग तरीके से होते थे दाखिले

अब तक निजी नर्सिंग और पैरामेडिकल कॉलेजों में 50 प्रतिशत सीटों पर प्रवेश लिखित परीक्षा के आधार पर होता था। बाकी सीटों पर कॉलेज प्रबंधन या संस्थानों की एसोसिएशन अपने स्तर पर एडमिशन देती थी।

इस व्यवस्था को लेकर कई बार सवाल उठे थे। छात्रों का कहना था कि अलग-अलग प्रक्रिया होने से योग्य अभ्यर्थियों को नुकसान होता है। इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने नई व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया है।

अब सभी सीटों पर होगी समान प्रक्रिया

नई व्यवस्था के तहत सभी सीटों के लिए पहले प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी। इसके बाद एचएनबी मेडिकल विश्वविद्यालय की ओर से केंद्रीकृत काउंसलिंग कराई जाएगी।

अधिकारियों के अनुसार, यदि काउंसलिंग के बाद कुछ सीटें खाली रह जाती हैं तो उन्हें 12वीं कक्षा के अंकों की मेरिट के आधार पर भरा जाएगा। इससे खाली सीटों की संख्या कम होने की उम्मीद है।

राज्य में हैं हजारों सीटें

उत्तराखंड में नर्सिंग और पैरामेडिकल कोर्सों की करीब 15 हजार सीटें उपलब्ध हैं। हर साल बड़ी संख्या में छात्र इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आवेदन करते हैं।

सरकार का मानना है कि एक समान प्रवेश प्रणाली लागू होने से छात्रों के बीच प्रतिस्पर्धा निष्पक्ष होगी और बेहतर प्रतिभाओं को अवसर मिलेगा।

परीक्षा की तारीखों का ऐलान

राज्य सरकार ने प्रवेश परीक्षाओं का कार्यक्रम भी जारी कर दिया है। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 15 मई से शुरू होगी, जबकि आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 5 जून रखी गई है।

13 जून को बीएससी नर्सिंग और जीएनएम पोस्ट बेसिक नर्सिंग की परीक्षा आयोजित की जाएगी। इसके अगले दिन यानी 14 जून को एएनएम, एमएससी नर्सिंग और पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षाएं होंगी।

स्वास्थ्य विभाग ने जारी किए निर्देश

इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग की ओर से आधिकारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं। विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था भारतीय नर्सिंग परिषद के नियमों और राज्य के प्रावधानों के अनुसार लागू की गई है।

अधिकारियों के अनुसार, इससे प्रवेश प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनेगी। साथ ही छात्रों को समान अवसर उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी।

छात्रों और अभिभावकों में बढ़ी उम्मीद

नई व्यवस्था लागू होने के बाद कई छात्रों और अभिभावकों ने इसे सकारात्मक कदम बताया है। उनका कहना है कि अब सभी अभ्यर्थियों को एक समान प्रक्रिया से गुजरना होगा, जिससे चयन में निष्पक्षता बढ़ेगी।

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का भी मानना है कि केंद्रीकृत प्रवेश प्रक्रिया से निजी संस्थानों में पारदर्शिता बढ़ेगी और योग्य छात्रों को प्राथमिकता मिलेगी।

मेडिकल शिक्षा में सुधार की दिशा में कदम

राज्य सरकार इसे मेडिकल और स्वास्थ्य शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रही है। आने वाले समय में प्रवेश प्रक्रिया को और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने पर भी विचार किया जा रहा है।

सरकार का कहना है कि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने और चयन प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने के लिए इस तरह के सुधार जरूरी हैं।

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