उत्तराखण्ड

Dehradun BRTS Project Update: दून में मेट्रो का सपना टूटा तो क्या हुआ, अब हवा से बातें करेंगी बसें…

Dehradun BRTS Project Update: देहरादून की सड़कों पर बढ़ते ट्रैफिक के दबाव को कम करने के लिए सरकार ने अब एक बड़ा और व्यावहारिक कदम उठाया है। मेट्रो नियो प्रोजेक्ट के निरस्त होने के बाद अब राजधानी में त्वरित बस परिवहन प्रणाली यानी बीआरटीएस को लागू करने की तैयारी जोर-शोर से शुरू हो गई है। उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की बैठक में (Urban Transportation Strategy) को नई दिशा देते हुए मुख्य सचिव ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के प्रस्ताव को अपनी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।

Dehradun BRTS Project Update
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डेडीकेटेड ऐलिवेटेड कॉरिडोर से सफर होगा आसान

इस नई प्रणाली की सबसे खास बात यह है कि शहर के बीचों-बीच ई-बीआरटीएस और ई-बसों के सुचारू संचालन के लिए एक विशेष ऐलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा। यह कॉरिडोर जमीन से ऊपर होगा, जिससे नीचे की सड़कों पर जाम की स्थिति पैदा नहीं होगी। इस (Infrastructure Development) के जरिए सरकार दून वासियों को एक ऐसा विकल्प देना चाहती है जो न केवल आधुनिक हो, बल्कि समय की बचत करने वाला भी साबित हो।

टू-लेन नहीं अब बनेगा शानदार फोर-लेन कॉरिडोर

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने प्रोजेक्ट की समीक्षा के दौरान एक बेहद महत्वपूर्ण बदलाव के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इस कॉरिडोर को टू-लेन के बजाय फोर-लेन बनाया जाए। इसमें (Traffic Management System) को इस तरह व्यवस्थित किया जाएगा कि दो लेन बीआरटीएस के लिए आरक्षित होंगी, जबकि शेष दो लेन पर सामान्य बसों का संचालन किया जा सकेगा ताकि आम जनता को भी इसका लाभ मिल सके।

पार्किंग और बुनियादी सुविधाओं पर विशेष जोर

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने केवल परिवहन ही नहीं, बल्कि यात्रियों की अन्य सुविधाओं पर भी ध्यान केंद्रित करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रोजेक्ट के डिजाइन में पार्किंग की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए। किसी भी (Urban Infrastructure Project) की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वहां पहुंचने वाले यात्रियों के लिए पर्याप्त जगह हो। इसके लिए अधिकारियों को नए सिरे से संशोधित प्लान जल्द पेश करने को कहा गया है।

दो कॉरिडोर और 35 स्टेशनों का मास्टर प्लान

बीआरटीएस प्रोजेक्ट के तहत देहरादून शहर को दो मुख्य हिस्सों में जोड़कर कवर किया जाएगा। पहले चरण में आईएसबीटी से मसूरी डाइवर्जन तक 13.69 किलोमीटर लंबा मार्ग तैयार होगा, जिसमें 17 स्टेशन बनाए जाएंगे। वहीं दूसरा कॉरिडोर (Public Transport Network) का विस्तार करते हुए प्रेमनगर से रायपुर तक जाएगा, जिसकी लंबाई 17.83 किलोमीटर होगी। इन दोनों कॉरिडोर के बनने से शहर के चारों कोनों तक पहुंच आसान हो जाएगी।

105 करोड़ की लागत से बदलेगी शहर की तस्वीर

इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए लगभग 105 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है। 31.52 किलोमीटर लंबे इस सफर में कुल 35 अत्याधुनिक स्टेशन विकसित किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि (Project Cost Estimation) के लिहाज से यह मेट्रो के मुकाबले काफी किफायती और जल्द पूरा होने वाला प्रोजेक्ट है। इससे न केवल सरकारी खजाने पर बोझ कम पड़ेगा, बल्कि लोगों को जल्द ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मिलने लगेंगी।

हरिद्वार में रोपवे और भूमि अधिग्रहण पर मंथन

सचिवालय में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में केवल देहरादून ही नहीं, बल्कि हरिद्वार की परियोजनाओं पर भी चर्चा हुई। हरकी पैड़ी से चंडीदेवी रोपवे के लिए निविदा प्रक्रिया और निजी भूमि के अधिग्रहण का मामला भी पटल पर रखा गया। मुख्य सचिव ने (Environmental Clearances) को अनिवार्य बताते हुए निर्देश दिए कि वन विभाग से औपचारिक अनुमति मिलने के बाद ही इस दिशा में कदम बढ़ाए जाएं, ताकि पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचे।

भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार उत्तराखंड

देहरादून में जिस तेजी से आबादी और वाहनों की संख्या बढ़ रही है, उसे देखते हुए यह प्रोजेक्ट गेम-चेंजर साबित हो सकता है। सरकार का उद्देश्य एक ऐसा (Integrated Transport System) तैयार करना है जो अगले कई दशकों तक शहर की जरूरतों को पूरा कर सके। बैठक में वित्त सचिव, परिवहन सचिव और लोनिवि के आला अधिकारियों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि शासन इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए पूरी तरह गंभीर है।

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