DemographicSurvey – उत्तराखंड में आबादी और मकानों की संख्या में हुआ बड़ा इजाफा
DemographicSurvey – उत्तराखंड में बीते डेढ़ दशक के दौरान जनसंख्या, परिवारों और मकानों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। हाल ही में पूरी हुई भवन गणना के आंकड़ों ने राज्य में तेजी से बढ़ते शहरी विस्तार और जनसंख्या दबाव की तस्वीर सामने रखी है। जनगणना निदेशालय के अनुसार राज्य की आबादी अब 1.27 करोड़ से अधिक हो चुकी है। इसी अवधि में परिवारों की संख्या में करीब 40 प्रतिशत और मकानों में 33 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इन आंकड़ों के सामने आने के साथ ही निर्वाचन आयोग ने भी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की तैयारियां तेज कर दी हैं।

भवन गणना में सामने आए नए आंकड़े
राज्य में 24 अप्रैल से शुरू हुई भवन गणना का कार्य अब पूरा हो चुका है। इस अभियान में 32 हजार से अधिक कर्मचारियों ने घर-घर जाकर जानकारी जुटाई। जनगणना निदेशालय ने सर्वे के लिए पूरे राज्य को करीब 29 हजार हिस्सों में बांटा था। अधिकारियों के मुताबिक सर्वे के दौरान हर मकान, परिवार और आबादी से जुड़ी जानकारी दर्ज की गई।
प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड में मकानों की संख्या अब 45 लाख तक पहुंच गई है। वर्ष 2011 की जनगणना में यह आंकड़ा लगभग 33.8 लाख था। यानी पिछले 15 वर्षों में करीब 11 लाख से ज्यादा नए मकान बने हैं। विशेषज्ञ इसे राज्य में तेजी से बढ़ते शहरीकरण, नए आवासीय क्षेत्रों के विकास और रियल एस्टेट गतिविधियों में आई तेजी से जोड़कर देख रहे हैं।
आबादी में 26 प्रतिशत वृद्धि दर्ज
राज्य की जनसंख्या में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2011 में उत्तराखंड की आबादी लगभग 1.01 करोड़ थी, जो अब बढ़कर 1.27 करोड़ के पार पहुंच गई है। आंकड़ों के अनुसार बीते डेढ़ दशक में आबादी में करीब 26 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। खासतौर पर देहरादून, हरिद्वार और उधम सिंह नगर जैसे मैदानी जिलों में जनसंख्या का दबाव तेजी से बढ़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रोजगार, शिक्षा और बेहतर सुविधाओं के कारण ग्रामीण इलाकों से शहरों की ओर पलायन भी इसका एक बड़ा कारण है। इससे शहरी क्षेत्रों में आवास और बुनियादी सुविधाओं की मांग लगातार बढ़ रही है।
संयुक्त परिवारों का दायरा घटा
सर्वे में परिवारों की संख्या में भी बड़ी बढ़ोतरी सामने आई है। 2011 में राज्य में लगभग 20 लाख परिवार थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 28.3 लाख हो गई है। यानी करीब 8 लाख नए परिवार अस्तित्व में आए हैं। अधिकारियों का कहना है कि एकल परिवारों का चलन बढ़ने से यह बदलाव तेजी से दिखाई दे रहा है।
सामाजिक जानकारों के मुताबिक रोजगार और शिक्षा के लिए अलग रहने की प्रवृत्ति बढ़ने से संयुक्त परिवारों का दायरा सिमट रहा है। इसका असर राज्य की सामाजिक संरचना और शहरी जीवनशैली दोनों पर दिखाई दे रहा है।
निर्वाचन आयोग ने शुरू की विशेष तैयारी
इसी बीच मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने देहरादून पहुंचकर विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की समीक्षा की। बैठक में मतदाता सूची को अद्यतन और शुद्ध करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान के तहत मृत, स्थानांतरित, दो जगह नाम दर्ज कराने वाले और विदेशी मतदाताओं की पहचान की जाएगी।
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने बताया कि प्री-एसआईआर चरण में 89 प्रतिशत मैपिंग पूरी हो चुकी है। बीएलओ और फील्ड स्टाफ को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही राजनीतिक दलों के साथ नियमित बैठकें भी की जा रही हैं ताकि प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।
अंतिम आंकड़े केंद्र सरकार जारी करेगी
जनगणना निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि भवन गणना का काम पूरा होने के बाद अब अगला चरण शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अभी जो आंकड़े सामने आए हैं, वे प्रारंभिक हैं। अंतिम आंकड़े केंद्र सरकार की ओर से आधिकारिक रूप से जारी किए जाएंगे।
राज्य में तेजी से बढ़ती आबादी और शहरी विस्तार ने आने वाले वर्षों में बुनियादी सुविधाओं, आवास और प्रशासनिक योजनाओं को लेकर नई चुनौतियों की ओर भी संकेत दिया है।