ForestControversy – राजाजी रिजर्व में शादी को लेकर कार्रवाई, मंदिर समिति पर हुआ केस
ForestControversy – उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व में स्थित सुरेश्वरी देवी मंदिर में एक निजी विवाह समारोह को लेकर विवाद गहरा गया है। मामला तब सामने आया जब आरक्षित वन क्षेत्र के भीतर शादी की तैयारियां शुरू हो गईं, जिसके बाद वन विभाग ने हस्तक्षेप करते हुए आयोजन रुकवा दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने पर्यावरणीय नियमों और प्रशासनिक अनुमति को लेकर बहस छेड़ दी है।

बिना अनुमति आयोजन पर प्रशासन का एक्शन
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आरक्षित क्षेत्र में किसी भी बड़े आयोजन की अनुमति नहीं दी जाती है। बावजूद इसके मंदिर परिसर में शादी की तैयारियों के तहत टेंट और अन्य सामग्री पहुंचाई जा रही थी।
जैसे ही यह जानकारी अधिकारियों तक पहुंची, मौके पर पहुंचकर तैयारियों को रोक दिया गया और लगाए गए पंडाल को हटवा दिया गया। साथ ही नियमों के उल्लंघन के आरोप में मंदिर समिति के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
सोशल मीडिया पर वीडियो से बढ़ा मामला
इस घटना का एक वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से फैल गया। सोशल मीडिया पर इसे लेकर सवाल उठने लगे कि वन्यजीव क्षेत्र में इस तरह का आयोजन कैसे संभव हुआ।
इसके बाद प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजनों के लिए अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि इससे वन्यजीवों और पर्यावरण पर असर पड़ता है।
मंत्री का पक्ष और स्पष्टीकरण
इस पूरे मामले में संबंधित मंत्री ने कहा कि उनकी इच्छा थी कि परिवार का कार्यक्रम मंदिर परिसर में आयोजित हो। हालांकि, उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि इसके लिए अलग से औपचारिक अनुमति लेनी जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि पहले ही नियमों की जानकारी दी गई होती, तो आयोजन किसी अन्य स्थान पर किया जा सकता था। उन्होंने विवाद को अनावश्यक बताते हुए इसे गलतफहमी का परिणाम बताया।
सीमित रूप में संपन्न हुआ विवाह संस्कार
विवाद के बीच अंततः कार्यक्रम को सीमित रूप में संपन्न किया गया। मंदिर परिसर में केवल पूजा-अर्चना और पारंपरिक रस्में ही कराई गईं।
बड़े स्तर के आयोजन को पूरी तरह से रोक दिया गया और प्रशासन की निगरानी में कार्यक्रम संपन्न हुआ। इससे यह सुनिश्चित किया गया कि वन क्षेत्र के नियमों का पालन हो।
श्रद्धालुओं को हुई असुविधा
इस पूरे घटनाक्रम का असर आम श्रद्धालुओं पर भी पड़ा। मंदिर में प्रवेश पर रोक के कारण कई लोग दर्शन नहीं कर सके और उन्हें वापस लौटना पड़ा।
कुछ श्रद्धालुओं ने बताया कि वे दूर-दराज से दर्शन के लिए आए थे, लेकिन मंदिर परिसर में प्रवेश नहीं मिलने से निराशा हुई। इस स्थिति को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चर्चा रही।
नियमों और जिम्मेदारी पर उठे सवाल
घटना के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि बिना अनुमति इतनी बड़ी तैयारियां कैसे शुरू हो गईं। स्थानीय स्तर पर निगरानी और नियमों के पालन को लेकर भी चर्चा हो रही है।
वन विभाग का कहना है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्ती बढ़ाई जाएगी। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आरक्षित क्षेत्रों में किसी भी गतिविधि से पर्यावरण और वन्यजीवों को नुकसान न पहुंचे।