उत्तराखण्ड

GasShortage – गैस संकट से चाय विक्रेताओं की आजीविका पर असर

GasShortage – शहर में गैस सिलिंडर की कमी अब केवल घरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका सीधा असर छोटे कारोबारियों की रोजी-रोटी पर भी दिखने लगा है। खासतौर पर चाय की ठेलियों और टपरियों पर निर्भर रहने वाले लोगों के लिए हालात मुश्किल होते जा रहे हैं। जहां पहले ये ठेलियां सुबह से रात तक ग्राहकों से भरी रहती थीं, वहीं अब गैस की अनुपलब्धता के कारण कई जगहों पर सन्नाटा नजर आ रहा है

gas shortage impact on tea vendors livelihood

चाय के कारोबार पर बढ़ता दबाव

गैस सिलिंडर की कीमतों में बढ़ोतरी और समय पर सप्लाई न मिलने से चाय बनाना छोटे दुकानदारों के लिए चुनौती बन गया है। चाय का पूरा कारोबार गैस पर आधारित होता है, ऐसे में जब सिलिंडर ही उपलब्ध नहीं है, तो दुकान चलाना संभव नहीं रह जाता। कई विक्रेताओं का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत ने उनके मुनाफे को भी लगभग खत्म कर दिया है, जिससे कारोबार टिकाना मुश्किल हो गया है।

वैकल्पिक व्यवसाय की ओर रुख

हालात से समझौता करते हुए कई चाय विक्रेताओं ने अब अपने काम का स्वरूप बदल लिया है। कुछ लोग शिकंजी और गन्ने के जूस के स्टॉल लगाने लगे हैं, ताकि बिना गैस के भी कमाई जारी रखी जा सके। यह बदलाव मजबूरी में किया गया कदम है, क्योंकि मौजूदा स्थिति में चाय का कारोबार चलाना उनके लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है।

सिलिंडर न मिलने से काम ठप

प्रिंस चौक पर ठेला लगाने वाले रौशन बताते हैं कि पिछले करीब 20 दिनों से उनका चाय का काम पूरी तरह बंद है। उनका कहना है कि न तो गैस सिलिंडर मिल पा रहे हैं और न ही बुकिंग संभव हो रही है। ऐसे में उन्होंने शिकंजी बेचने का काम शुरू कर दिया है, जिससे किसी तरह दैनिक खर्च पूरे हो सकें। इसी तरह कई अन्य विक्रेता भी अपनी पुरानी पहचान छोड़कर नए विकल्प तलाशने को मजबूर हैं।

सीमित संसाधनों में गुजारा

राजपुर क्षेत्र में टपरी चलाने वाले राकेश का कहना है कि उनका गैस सिलिंडर खत्म हुए एक सप्ताह से ज्यादा हो चुका है, लेकिन अभी तक नया सिलिंडर नहीं मिला है। उन्होंने चाय बनाना बंद कर दिया है और फिलहाल केवल बिस्कुट और नमकीन बेचकर काम चला रहे हैं। यह स्थिति न केवल उनकी आय को प्रभावित कर रही है, बल्कि ग्राहकों की संख्या भी लगातार घट रही है।

कुछ दुकानों पर ताले लगने की नौबत

स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि कुछ छोटे दुकानदारों को अपनी दुकानें बंद करनी पड़ी हैं। पटेल नगर के एक टपरी संचालक ने बताया कि गैस न मिलने के कारण उनका काम पूरी तरह रुक गया, जिससे उन्हें दुकान बंद करने का निर्णय लेना पड़ा। इससे उनकी आय का मुख्य स्रोत भी खत्म हो गया है और आर्थिक संकट गहराता जा रहा है।

रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा असर

गैस संकट का असर केवल कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े लोगों के परिवारों की दैनिक जरूरतें भी प्रभावित हो रही हैं। छोटे स्तर पर काम करने वाले ये व्यापारी आम तौर पर दिन की कमाई पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में जब काम ठप होता है, तो घर चलाना भी कठिन हो जाता है। स्थिति में सुधार के लिए समय पर गैस आपूर्ति और कीमतों में संतुलन की जरूरत महसूस की जा रही है।

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.