उत्तराखण्ड

Kedarnath – बर्फ की चादर में ढका धाम, कपाट खुलने की तैयारी तेज

Kedarnath – उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम में इन दिनों भारी बर्फबारी के चलते पूरा इलाका सफेद चादर से ढक गया है। मंदिर परिसर से लेकर पूरी केदार घाटी तक तीन से चार फीट तक बर्फ जमा हो चुकी है, जिससे आसपास का दृश्य बेहद आकर्षक और शांत नजर आ रहा है। मंदिर समिति के अनुसार, कठिन मौसम के बावजूद धाम की सुरक्षा और व्यवस्थाएं लगातार बनाए रखी जा रही हैं। इस वर्ष केदारनाथ मंदिर के कपाट 22 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे, जबकि गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल से खुलेंगे।

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कड़ी ठंड में भी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत

शून्य से नीचे तापमान और लगातार हो रही बर्फबारी के बीच इंडो तिब्बतन बॉर्डर पुलिस और उत्तराखंड पुलिस के जवान तैनात हैं। वे कठिन परिस्थितियों में भी पूरे क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने में जुटे हुए हैं। जवान नियमित रूप से गश्त कर रहे हैं और आसपास के इलाकों पर नजर बनाए हुए हैं।

बर्फ की मोटी परत के कारण रास्तों और बैरकों के आसपास भी काफी दिक्कतें हैं, जिन्हें जवान खुद साफ कर रहे हैं। उनका प्रयास है कि किसी भी प्रकार की बाधा सुरक्षा व्यवस्था या तैयारियों को प्रभावित न करे।

पर्यटन को बढ़ावा देने पर सरकार का जोर

राज्य सरकार धार्मिक पर्यटन को और सुदृढ़ बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ आध्यात्मिक और साहसिक पर्यटन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

सरकार का मानना है कि बेहतर सुविधाओं के जरिए अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को आकर्षित किया जा सकता है। इसी दिशा में यात्रा मार्गों को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

रोपवे परियोजनाओं से यात्रा होगी आसान

तीर्थयात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए राज्य में कई रोपवे परियोजनाओं पर काम प्रस्तावित है। सोनप्रयाग से केदारनाथ तक लगभग 12.9 किलोमीटर लंबा रोपवे बनाने की योजना है, जिसकी अनुमानित लागत 4 हजार करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।

इसी तरह गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक भी रोपवे निर्माण की योजना है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद यात्रा का समय कम होगा और श्रद्धालुओं को कम शारीरिक मेहनत करनी पड़ेगी। इससे बुजुर्ग और असहाय लोगों के लिए यात्रा और अधिक सुगम हो सकेगी।

शीतकालीन यात्रा को भी मिल रहा समर्थन

पिछले कुछ वर्षों में राज्य में शीतकालीन यात्रा को लेकर भी लोगों की रुचि बढ़ी है। सर्दियों के दौरान जब चारधाम के कपाट बंद रहते हैं, तब भी श्रद्धालु संबंधित शीतकालीन गद्दी स्थलों पर दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

सरकार द्वारा इस पहल को बढ़ावा दिए जाने के बाद इसमें और तेजी आई है। इससे पर्यटन के दायरे का विस्तार हुआ है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिला है।

कपाट खुलने से पहले तैयारियां जारी

कपाट खुलने की तिथि नजदीक आते ही प्रशासन और मंदिर समिति तैयारियों में जुट गई है। बर्फ हटाने से लेकर रास्तों की मरम्मत तक के काम चरणबद्ध तरीके से किए जा रहे हैं।

उद्देश्य यह है कि जब यात्रा शुरू हो, तब श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। सुरक्षा, स्वास्थ्य और आवागमन से जुड़ी व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि यात्रा सुचारू रूप से संचालित हो सके।

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