LegalUpdate – शिक्षा निदेशालय विवाद मामले में दोनों पक्षों को मिली राहत
LegalUpdate – देहरादून के ननूरखेड़ा स्थित शिक्षा निदेशालय में कुछ महीने पहले हुए चर्चित विवाद और मारपीट प्रकरण में अब कानूनी प्रक्रिया लगभग समाप्त हो गई है। रायपुर से भाजपा विधायक उमेश शर्मा काऊ और शिक्षा विभाग के अधिकारियों से जुड़े इस मामले में पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर दी है। दोनों पक्षों की ओर से आगे किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं चाहने की बात सामने आने के बाद पुलिस ने केस बंद करने की प्रक्रिया पूरी की।

यह मामला फरवरी महीने में सामने आया था, जब शिक्षा निदेशालय परिसर में विवाद और हंगामे की घटना हुई थी। घटना के बाद दोनों पक्षों की ओर से रायपुर थाने में मुकदमे दर्ज कराए गए थे। मामले ने उस समय राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में काफी चर्चा बटोरी थी।
आपसी सहमति के बाद मामला शांत
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान दोनों पक्षों ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शपथ पत्र सौंपा। इसमें उन्होंने आपसी सहमति बनने और आगे किसी कार्रवाई की आवश्यकता न होने की बात कही। इसके बाद यह दस्तावेज संबंधित थाने को भेजा गया, जिसके आधार पर पुलिस ने कोर्ट में अपनी अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी।
ग्रामीण पुलिस अधीक्षक जया बलोनी ने बताया कि यदि दोनों पक्ष समझौते पर नहीं पहुंचते, तो पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों, बयान और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आगे की कार्रवाई करती। हालांकि अब दोनों पक्षों की सहमति के बाद मामला समाप्ति की ओर बढ़ गया है।
विद्यालय के नामकरण को लेकर शुरू हुआ था विवाद
जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत रायपुर क्षेत्र में बने एक विद्यालय के नामकरण को लेकर हुई थी। विधायक उमेश शर्मा काऊ स्कूल का नाम उस व्यक्ति के नाम पर रखने की मांग कर रहे थे जिसने जमीन दान की थी। इसी मुद्दे को लेकर वह अपने समर्थकों के साथ शिक्षा निदेशालय पहुंचे थे।
घटना के दौरान निदेशालय परिसर में बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई थी। आरोप लगाया गया था कि वहां मौजूद कुछ लोगों ने तत्कालीन शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौडियाल के साथ अभद्र व्यवहार किया और तोड़फोड़ भी की। इसके बाद शिक्षा विभाग की ओर से विधायक और उनके समर्थकों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी।
दोनों तरफ से दर्ज हुए थे मुकदमे
घटना के बाद विधायक पक्ष की ओर से भी क्रॉस केस दर्ज कराया गया था। विधायक के सुरक्षा कर्मी की शिकायत पर भी मामला दर्ज हुआ था। इस कारण पूरा प्रकरण हाई-प्रोफाइल बन गया था और पुलिस लगातार मामले की जांच कर रही थी।
उस समय घटना को लेकर शिक्षक संगठनों और कर्मचारियों ने भी नाराजगी जताई थी। शिक्षा विभाग से जुड़े कई लोगों ने निदेशालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक गरिमा को लेकर चिंता व्यक्त की थी।
पुलिस ने पहले की थी कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने शुरुआती जांच के दौरान कुछ आरोपियों को हिरासत में भी लिया था। इनमें क्षेत्र के चर्चित हिस्ट्रीशीटर अरविंद सिंह पुंडीर उर्फ कल्ली का नाम भी शामिल था। पुलिस ने घटना से जुड़े वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई शुरू की थी।
अब दोनों पक्षों के बीच समझौता होने के बाद इस पूरे मामले की कानूनी प्रक्रिया लगभग खत्म मानी जा रही है। पुलिस का कहना है कि कोर्ट में अंतिम रिपोर्ट दाखिल किए जाने के बाद आगे की कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों के अनुसार होगी।