Literacy – उत्तराखंड बना देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य, शिक्षा में मिली नई उपलब्धि
Literacy – उत्तराखंड ने शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए देश के छठे पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा प्राप्त कर लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य ने National Education Policy (NEP) 2020 और ULLAS (Understanding Lifelong Learning for All in Society) कार्यक्रम के निर्धारित मानकों को पूरा करने के बाद यह उपलब्धि हासिल की है। इस अभियान के दौरान विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जहां महिला साक्षरता दर अपेक्षाकृत कम थी। इससे पहले सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, त्रिपुरा, गोवा और मिजोरम पूर्ण साक्षर राज्यों की सूची में शामिल हो चुके हैं।

साक्षरता बढ़ाने पर रहा विशेष जोर
राज्य सरकार ने वयस्क शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए पिछले कुछ वर्षों में कई स्तरों पर अभियान चलाए। विद्यालयी शिक्षा विभाग के अनुसार, प्रदेश में बुनियादी साक्षरता के साथ जीवनोपयोगी कौशल, व्यावसायिक प्रशिक्षण, सतत शिक्षा और वित्तीय जागरूकता जैसे विषयों पर भी लगातार काम किया गया। अधिकारियों का कहना है कि राज्य की साक्षरता दर अब 98 प्रतिशत से अधिक पहुंच चुकी है, जो निर्धारित मानकों से ऊपर है।
मंजूरी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मिली पहचान
पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किए जाने से पहले इस प्रस्ताव को राज्य सरकार ने औपचारिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया। विद्यालयी शिक्षा विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष रखा, जहां आवश्यक चर्चा के बाद इसे मंजूरी दी गई। इसके बाद प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया। 19 जून को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की गई।
मुख्यमंत्री ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि
इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए इसे राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में मिली यह सफलता विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार आगे भी डिजिटल साक्षरता, वित्तीय जागरूकता, सतत शिक्षा और जीवन कौशल को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास करती रहेगी।
क्या है पूर्ण साक्षर राज्य का मानक
ULLAS कार्यक्रम के तहत किसी राज्य को पूर्ण साक्षर तब माना जाता है, जब वहां 15 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों में साक्षरता दर लगभग 95 प्रतिशत या उससे अधिक हो और गैर-साक्षर वयस्कों तक शिक्षा पहुंचाने का लक्ष्य प्रभावी रूप से पूरा कर लिया जाए। इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पढ़ना-लिखना सिखाना नहीं, बल्कि लोगों को दैनिक जीवन में उपयोगी ज्ञान और कौशल से भी जोड़ना है। उत्तराखंड ने इन्हीं मानकों को पूरा करते हुए देश के पूर्ण साक्षर राज्यों की सूची में अपना स्थान बनाया है।