Rabies Alert – पिथौरागढ़ में छात्र की हालत गंभीर, गांव में बढ़ी चिंता
Rabies Alert – उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के धारचूला क्षेत्र में रेबीज से जुड़ा एक और चिंताजनक मामला सामने आया है। आठवीं कक्षा के एक छात्र को गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां चिकित्सकों ने उसमें रेबीज से मिलते-जुलते लक्षण पाए हैं। यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि कुछ ही दिन पहले इसी गांव के एक अन्य किशोर की संदिग्ध रेबीज संक्रमण के बाद मौत हो चुकी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दोनों बच्चों को एक ही लावारिस कुत्ते के पिल्ले ने काटा था।

छात्र में दिखाई दिए गंभीर लक्षण
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार धारचूला तहसील के जुम्मा गांव के बुंगा तोक निवासी 14 वर्षीय युवराज सिंह धामी की तबीयत बुधवार को अचानक बिगड़ गई। परिजनों ने बताया कि उसे पानी और हवा से असामान्य डर महसूस होने लगा था। इसके साथ ही बार-बार बेचैनी, चिल्लाना और मुंह से लार निकलने जैसे लक्षण भी सामने आए। हालत गंभीर होने पर उसे तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया।
जिला अस्पताल में तैनात चिकित्सकों ने प्राथमिक जांच के बाद बताया कि किशोर में रेबीज संक्रमण से जुड़े लक्षण नजर आए हैं। स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर उपचार के लिए उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर कर दिया गया है।
फरवरी में हुआ था कुत्ते का हमला
परिजनों के मुताबिक युवराज को 28 फरवरी को एक लावारिस कुत्ते के पिल्ले ने काट लिया था। उस समय चोट लगने के बाद उसका समुचित उपचार नहीं कराया गया। स्थानीय स्तर पर सामान्य देखभाल की गई, लेकिन समय रहते आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि कुत्ते के काटने के बाद तुरंत उपचार और एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाना बेहद जरूरी होता है। देर होने पर संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
गांव में पहले भी सामने आ चुका है मामला
जुम्मा गांव में इससे पहले भी एक किशोर में रेबीज जैसे लक्षण पाए गए थे। गांव के निवासी मोहित धामी की तबीयत मई महीने में बिगड़ी थी और बाद में उसकी मृत्यु हो गई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि मोहित को भी उसी कुत्ते के पिल्ले ने काटा था जिसने युवराज को घायल किया था।
मोहित की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाने और प्रभावित लोगों की पहचान करने का प्रयास किया गया। इसी दौरान युवराज को 26 मई को एंटी रेबीज टीका लगाया गया था, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार काटे जाने और टीकाकरण के बीच काफी समय बीत चुका था।
कई अन्य ग्रामीणों को भी काट चुका था पिल्ला
परिजनों और ग्रामीणों के अनुसार संबंधित लावारिस पिल्ले ने गांव के करीब पांच अन्य लोगों को भी अलग-अलग समय पर काटा था। बताया जा रहा है कि कुछ महीने पहले उस पिल्ले की भी मौत हो गई थी। इसके बाद गांव में लोगों के बीच संक्रमण को लेकर चिंता बढ़ गई है।
स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम मामले पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी जानवर के काटने की घटना को हल्के में न लें और तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर उपचार और वैक्सीनेशन से रेबीज जैसी गंभीर बीमारी से बचाव संभव है।