उत्तराखण्ड

RaggingCase – दून मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का नया मामला, शुरू हुई जांच

RaggingCase – दून मेडिकल कॉलेज में एक बार फिर रैगिंग से जुड़ा मामला सामने आने के बाद संस्थान की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। एमबीबीएस प्रथम वर्ष के एक छात्र ने आरोप लगाया है कि कुछ वरिष्ठ छात्रों ने उस पर दाढ़ी और बाल कटवाने का दबाव बनाया। इस शिकायत के बाद कॉलेज प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है।

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छात्र की शिकायत के बाद हरकत में आया प्रशासन

पीड़ित छात्र के अनुसार, वह पिछले कुछ समय से वरिष्ठ छात्रों की ओर से मानसिक दबाव झेल रहा था। शुरुआत में उसने डर के कारण चुप रहना ही बेहतर समझा, लेकिन जब व्यक्तिगत रूप-रंग को लेकर दबाव बढ़ा, तब उसने एंटी रैगिंग सेल में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही एंटी रैगिंग कमेटी सक्रिय हो गई और संबंधित विभागों से रिपोर्ट मांगी गई है। कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने भी इस मामले में छात्रों से बातचीत कर तथ्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू की है।

पहले भी सामने आ चुके हैं गंभीर मामले

यह पहली बार नहीं है जब इस मेडिकल कॉलेज में रैगिंग की शिकायतें सामने आई हों। इसी वर्ष जनवरी में दो अलग-अलग घटनाओं ने माहौल को गंभीर बना दिया था। एक मामले में छात्र के साथ मारपीट की गई थी, जबकि दूसरे में पूरी कक्षा द्वारा एक छात्र को परेशान करने की बात सामने आई थी। उन मामलों में प्रशासन ने कुछ छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए जुर्माना और निष्कासन जैसे कदम उठाए थे।

शिक्षा के माहौल पर उठे सवाल

मेडिकल की पढ़ाई पहले ही कठिन मानी जाती है, जिसमें छात्रों को मानसिक रूप से पूरी तरह केंद्रित रहना होता है। ऐसे में रैगिंग जैसी घटनाएं न केवल छात्रों के आत्मविश्वास को प्रभावित करती हैं, बल्कि उनके शैक्षणिक प्रदर्शन पर भी असर डालती हैं। अभिभावक अपने बच्चों को सुरक्षित माहौल की उम्मीद के साथ संस्थानों में भेजते हैं, लेकिन बार-बार सामने आ रही घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं।

जीरो टॉलरेंस नीति पर फिर उठी बहस

कॉलेज प्रशासन लगातार रैगिंग के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात करता रहा है। प्राचार्य का कहना है कि संस्थान में इस तरह की गतिविधियों के लिए कोई जगह नहीं है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद बार-बार ऐसे मामलों का सामने आना इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करता है।

निगरानी व्यवस्था पर भी उठे सवाल

कॉलेज में एंटी रैगिंग कमेटी और फ्लाइंग स्क्वायड जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद घटनाएं सामने आना निगरानी प्रणाली की कमजोरियों की ओर इशारा करता है। सूत्रों के अनुसार, कैंपस और हॉस्टल में समन्वय की कमी और निगरानी तंत्र की ढिलाई इस तरह की घटनाओं को रोकने में बाधा बन रही है।

फिलहाल एंटी रैगिंग कमेटी पूरे मामले की जांच कर रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर मेडिकल संस्थानों में सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल सुनिश्चित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

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