उत्तराखण्ड

SonamWangchuk – उत्तराखंड हाई कोर्ट ने हिरासत मामले में पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

SonamWangchuk – उत्तराखंड हाई कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में दिल्ली जा रहे उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (UPP) के अध्यक्ष प्रभात ध्यानी को हिरासत में लेने के मामले में राज्य पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने सुनवाई के दौरान पुलिस के रवैये पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों का दायित्व नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है, न कि किसी सरकार की छवि बचाना। मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से हिरासत के कानूनी आधार की भी जानकारी मांगी गई।

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हिरासत के आधार पर अदालत ने मांगा जवाब

मामले की सुनवाई जस्टिस रवींद्र मैठाणी और जस्टिस सिद्धार्थ साहा की खंडपीठ ने की। अदालत के समक्ष राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि प्रभात ध्यानी को अब रिहा किया जा चुका है। इसके बावजूद न्यायालय ने यह स्पष्ट करने को कहा कि उन्हें हिरासत में लेने के लिए किन कानूनी प्रावधानों का सहारा लिया गया था। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने इस बात पर भी असंतोष जताया कि हिरासत की पुष्टि होने के बाद भी तत्काल रिहाई नहीं की गई।

पुलिस के रवैये पर सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि पुलिस का कार्य नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है। न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या पुलिस संवैधानिक जिम्मेदारियां निभा रही है या सरकार की छवि बचाने का प्रयास कर रही है। अदालत ने पुलिस के व्यवहार को अनुचित बताते हुए कहा कि कानून का पालन करते समय अधिकारों और प्रक्रियाओं का सम्मान किया जाना आवश्यक है।

अधिकार क्षेत्र को लेकर भी उठे सवाल

खंडपीठ ने यह भी पूछा कि यदि संभावित प्रदर्शन दिल्ली में होना था, तो उत्तराखंड में किसी व्यक्ति को पहले से हिरासत में लेने का कानूनी अधिकार किस आधार पर प्रयोग किया गया। अदालत ने संकेत दिया कि इस पहलू पर स्पष्ट कानूनी आधार प्रस्तुत किया जाना चाहिए। न्यायालय की टिप्पणी सुनवाई के दौरान दर्ज की गई, जबकि मामले की कानूनी प्रक्रिया जारी है।

संसद मार्च में शामिल होने जा रहे थे प्रभात ध्यानी

याचिका के अनुसार, प्रभात ध्यानी 19 जुलाई को ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से दिल्ली जाने वाली ट्रेन में सवार थे। बताया गया कि वे सोनम वांगचुक के आह्वान पर आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च में भाग लेने के लिए राष्ट्रीय राजधानी जा रहे थे। इससे पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर कहा था कि उनकी पार्टी शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर चल रहे आंदोलन का समर्थन करेगी और निर्धारित कार्यक्रम में शामिल होगी।

परिवार ने ठिकाने की जानकारी नहीं मिलने का लगाया आरोप

बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में आरोप लगाया गया कि हिरासत के बाद परिजनों को प्रभात ध्यानी के ठिकाने की तत्काल जानकारी नहीं दी गई, जिससे परिवार पूरी रात उनकी तलाश करता रहा। याचिका में यह भी कहा गया कि हिरासत की पुष्टि होने के बावजूद शुरुआत में उन्हें रिहा नहीं किया गया। इन आरोपों के संबंध में न्यायालय ने मामले के तथ्यों को रिकॉर्ड पर लिया और आगे की प्रक्रिया जारी रखी।

दिल्ली हाई कोर्ट में भी लंबित है संबंधित मामला

इसी घटनाक्रम से जुड़े एक अन्य मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने उस जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी है, जिसमें संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस द्वारा कथित बल प्रयोग पर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई है। अदालत आगामी सुनवाई में प्रस्तुत तथ्यों और संबंधित पक्षों की दलीलों पर विचार करेगी।

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