उत्तराखण्ड

Weather Alert – उत्तराखंड में बदलेगा मौसम, चारधाम यात्रियों को सावधानी की सलाह…

Weather Alert – उत्तराखंड में अगले कुछ दिनों के दौरान मौसम का मिजाज तेजी से बदलने वाला है। मौसम विभाग ने 11 मई से 16 मई के बीच राज्य के कई हिस्सों में बारिश, तेज हवाएं और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना जताई है। खासतौर पर पर्वतीय जिलों के लिए सतर्कता बढ़ा दी गई है। चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी मौसम को देखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

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पहाड़ी जिलों के लिए जारी हुआ येलो अलर्ट

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार सोमवार को राज्य के कई पर्वतीय इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। मौसम निदेशक डॉ. सीएस तोमर ने जानकारी दी कि कुछ क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने की आशंका है। साथ ही आकाशीय बिजली गिरने की संभावना को देखते हुए लोगों को खुले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी गई है। पिछले 24 घंटों के दौरान मैदान और पहाड़ी दोनों क्षेत्रों में तापमान सामान्य से नीचे दर्ज किया गया।

चारधाम यात्रा को लेकर प्रशासन अलर्ट

12 और 13 मई को मौसम अधिक खराब रहने की संभावना को देखते हुए चारधाम यात्रा के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है। मौसम विभाग ने इन दो दिनों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि यात्रा शुरू करने से पहले मौसम की ताजा जानकारी जरूर लें और उसी के अनुसार अपना कार्यक्रम तय करें।

यात्रियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह

प्रशासन का कहना है कि खराब मौसम के दौरान पहाड़ी मार्गों पर फिसलन और दृश्यता कम होने जैसी दिक्कतें सामने आ सकती हैं। ऐसे में यात्रियों को प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि यदि संभव हो तो मौसम सामान्य होने के बाद यात्रा करना अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक रहेगा। राज्य सरकार ने भरोसा दिलाया है कि चारधाम यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

केदारनाथ यात्रा से जुड़ी पुरानी यादें फिर हुईं ताजा

चारधाम यात्रा के बीच कई श्रद्धालुओं के मन में वर्ष 2013 की आपदा से पहले वाले पुराने केदारनाथ मार्ग की यादें भी ताजा हो रही हैं। खासकर रामबाड़ा, गरुड़चट्टी और देवदर्शनी जैसे पड़ाव आज भी यात्रियों की भावनाओं से जुड़े हुए हैं। मध्य प्रदेश से पहुंचे 77 वर्षीय श्रद्धालु धानेश ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2010 में केदारनाथ यात्रा की थी और उस समय रामबाड़ा में विश्राम किया था। उनके अनुसार देवदर्शनी से मंदिर का पहला दृश्य आज भी उनके मन में बसा हुआ है।

गरुड़चट्टी का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व

पुराने पैदल मार्ग पर स्थित गरुड़चट्टी को केदारनाथ यात्रा का अहम पड़ाव माना जाता रहा है। यहां बाबा केदार की डोली यात्रा के दौरान ठहरती थी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु विश्राम करते थे। साधु-संतों का भी यह प्रमुख ठिकाना रहा है। आपदा के बाद मार्ग बदल गया, लेकिन गरुड़चट्टी आज भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है। इस स्थान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साधना स्थली के रूप में भी जाना जाता है, जिससे इसकी धार्मिक पहचान और मजबूत हुई है।

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