WildlifeCrime – हरिद्वार के जंगल में दो बाघों की हत्या से मचा हड़कंप
WildlifeCrime – उत्तराखंड के हरिद्वार वन प्रभाग में स्थित श्यामपुर रेंज से वन्यजीव अपराध का बेहद गंभीर मामला सामने आया है। जंगल के भीतर दो बाघों के शव मिलने के बाद वन विभाग और राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन में हलचल तेज हो गई है। शुरुआती जांच में आशंका जताई गई है कि शिकारियों ने जहरीला पदार्थ देकर दोनों बाघों को मार डाला और बाद में उनके पैर काट लिए। मृत बाघों में एक नर और एक मादा शामिल हैं, जिनकी उम्र करीब दो वर्ष बताई जा रही है।

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक रविवार शाम सजनपुर बीट क्षेत्र में नियमित गश्त के दौरान एक बाघ का शव मिला था। उसके पास ही एक मृत भैंस भी पड़ी थी। मौके की जांच में संकेत मिले कि भैंस के शव पर जहरीला पदार्थ लगाया गया था। माना जा रहा है कि बाघ ने वही मांस खाया, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद आरोपियों ने बाघ के पैर काट लिए और बाकी शव जंगल में ही छोड़ दिया।
जहरीला चारा बनाकर किया गया शिकार
वन अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी घटना योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दी गई। जांच में सामने आया कि कुछ लोगों ने पहले भैंस को मारा और फिर उसके शव पर जहरीला रसायन छिड़क दिया। जैसे ही बाघ ने उस मांस को खाया, उसकी हालत बिगड़ गई और कुछ समय बाद उसकी मौत हो गई। इसके बाद शिकारियों ने बाघ के शरीर के हिस्से काट लिए, जिनकी अवैध बाजार में तस्करी की आशंका जताई जा रही है।
इस मामले में वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए एक वन गुज्जर आलम उर्फ फम्मी को गिरफ्तार किया है। आरोपी श्यामपुर क्षेत्र की गुर्जर बस्ती का रहने वाला बताया जा रहा है। पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर वन विभाग ने इलाके में तलाशी अभियान तेज किया, जिसके बाद दूसरे बाघ का शव भी बरामद हुआ। यह शव पहले स्थान से करीब 150 मीटर दूर मिला और उसके भी चारों पैर गायब थे।
फरार आरोपियों की तलाश जारी
वन विभाग ने इस मामले में तीन अन्य लोगों की पहचान की है, जिनकी तलाश जारी है। फरार आरोपियों में आमिर हमजा, आशिक और जुप्पी के नाम सामने आए हैं। सभी श्यामपुर क्षेत्र की गुर्जर बस्ती के निवासी बताए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों को पकड़ने के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।
डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि दोनों मारे गए बाघ एक ही बाघिन के शावक थे। राहत की बात यह रही कि बाघों की खाल और दांत सुरक्षित मिले हैं, जिससे वन्यजीव तस्करी से जुड़े बड़े नेटवर्क की जांच में मदद मिल सकती है। अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2017 में भी चिड़ियापुर क्षेत्र में इसी तरह जहर देकर एक बाघ का शिकार किया गया था।
बाघिन की तलाश में बढ़ाई गई निगरानी
दोनों शावकों की मौत के बाद अब वन विभाग की चिंता उनकी मां को लेकर बढ़ गई है। संभावना जताई जा रही है कि बाघिन अभी भी आसपास के जंगलों में मौजूद हो सकती है। उसकी सुरक्षा और लोकेशन का पता लगाने के लिए श्यामपुर, चीला और रवासन क्षेत्र में बड़े स्तर पर सर्च अभियान चलाया जा रहा है।
वन विभाग ने जंगल के संवेदनशील इलाकों में 10 कैमरा ट्रैप लगाए हैं। करीब 50 वनकर्मियों और अधिकारियों की टीम लगातार निगरानी में जुटी हुई है। विभाग का कहना है कि कैमरों से मिलने वाले फुटेज और जंगल में मिले पगमार्क के आधार पर बाघिन की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
कॉर्बेट में भी दो हाथी लापता
इसी बीच कॉर्बेट नेशनल पार्क से भी एक चिंताजनक खबर सामने आई है। झिरना रेंज में गश्त के लिए इस्तेमाल किए जा रहे दो पालतू हाथी मंगलवार शाम अचानक लापता हो गए। पार्क प्रशासन को आशंका है कि दोनों हाथी जंगली झुंड के साथ जंगल की ओर निकल गए हैं। देर रात तक खोज अभियान जारी रहा, लेकिन उनका पता नहीं चल सका।