Cortisol Face – तनाव कैसे बदल देता है चेहरे की बनावट और क्यों दिखती है सूजन…
Cortisol Face – क्या आपको लगता है कि आपका चेहरा हाल के दिनों में पहले से ज्यादा गोल दिखने लगा है या आंखों के आसपास सूजन बनी रहती है? अक्सर लोग इसे नींद की कमी, थकान या ज्यादा नमक खाने का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक, चेहरे पर आने वाले ऐसे बदलाव लंबे समय तक बने मानसिक तनाव का संकेत भी हो सकते हैं। इसी स्थिति को आमतौर पर ‘कॉर्टिसोल फेस’ कहा जाता है, जिसमें तनाव हार्मोन का असंतुलन चेहरे की बनावट को प्रभावित करता है।

तनाव हार्मोन क्या होता है और क्यों जरूरी है
दिल्ली स्थित सीके बिड़ला हॉस्पिटल की फिजिशियन डॉ. मनीषा अरोड़ा बताती हैं कि कॉर्टिसोल एक स्टेरॉयड हार्मोन है, जो एड्रिनल ग्रंथियों से निकलता है। इसे आम भाषा में स्ट्रेस हार्मोन कहा जाता है। सामान्य परिस्थितियों में यह हार्मोन शरीर के लिए जरूरी होता है, क्योंकि यह इमरजेंसी हालात में एनर्जी देता है और शरीर को सतर्क रखता है। समस्या तब शुरू होती है जब यह हार्मोन लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा बना रहता है।
जब तनाव बन जाता है रोजमर्रा की आदत
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में काम का दबाव, आर्थिक चिंताएं, स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताना और पूरी नींद न लेना, ये सभी कारण शरीर को लगातार तनाव की स्थिति में रखते हैं। ऐसे में कॉर्टिसोल का स्तर घटने के बजाय लंबे समय तक बढ़ा रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हफ्तों या महीनों तक ऊंचा बना कॉर्टिसोल शरीर की सुरक्षा करने के बजाय नुकसान पहुंचाने लगता है। इसका असर मेटाबॉलिज्म, इम्युनिटी और हार्मोनल बैलेंस पर साफ दिखता है।
चेहरे पर क्यों दिखने लगता है असर
लगातार बढ़ा हुआ कॉर्टिसोल शरीर में फैट के जमा होने के तरीके को बदल देता है। खासतौर पर पेट, गर्दन और चेहरे के आसपास फैट इकट्ठा होने लगता है। यही वजह है कि वजन ज्यादा न बढ़ने के बावजूद चेहरा भरा हुआ और गोल नजर आने लगता है। कई मामलों में हाथ-पैर पतले रहते हैं, लेकिन चेहरा सूजा हुआ दिखता है, जिससे लोग भ्रमित हो जाते हैं।
‘कॉर्टिसोल फेस’ का मतलब क्या है
कॉर्टिसोल फेस कोई आधिकारिक मेडिकल टर्म नहीं है, लेकिन इसका इस्तेमाल उन बदलावों के लिए किया जाता है जो लंबे समय तक तनाव हार्मोन के बढ़े स्तर के कारण चेहरे पर नजर आते हैं। गंभीर मामलों में यही स्थिति कुशिंग सिंड्रोम जैसी बीमारी का रूप ले सकती है, जहां चेहरा गोल होकर ‘मून फेस’ जैसा दिखाई देता है। हालांकि हर सूजा हुआ चेहरा कुशिंग सिंड्रोम नहीं होता, लेकिन लगातार बदलाव को नजरअंदाज करना भी सही नहीं है।
चेहरे पर दिखने वाले आम लक्षण
कॉर्टिसोल फेस के संकेतों में चेहरे की सूजन, आंखों के नीचे पफीनेस, गालों और जॉलाइन की शेप का कम स्पष्ट होना शामिल है। इसके अलावा, त्वचा ज्यादा ऑयली हो सकती है, जिससे मुंहासों की समस्या बढ़ती है। डॉक्टरों के मुताबिक, कॉर्टिसोल कोलेजन और इलास्टिन को भी प्रभावित करता है, जिससे त्वचा ढीली और पतली लगने लगती है। समय के साथ चेहरे की फ्रेशनेस कम महसूस हो सकती है।
क्या इस स्थिति को सुधारा जा सकता है
अच्छी बात यह है कि कॉर्टिसोल फेस ज्यादातर मामलों में लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्या होती है और इसे काफी हद तक ठीक किया जा सकता है। इसके लिए किसी महंगे ट्रीटमेंट या कॉस्मेटिक प्रक्रिया की जरूरत नहीं होती। जरूरी है तो रोजमर्रा की आदतों में संतुलन लाने की।
किन बदलावों से मिल सकता है फायदा
विशेषज्ञ संतुलित और नियमित दिनचर्या पर जोर देते हैं। पर्याप्त और गहरी नींद, हरी सब्जियों, फाइबर और ओमेगा-3 से भरपूर आहार, रोजाना हल्की वॉक या एक्सरसाइज, योग और मेडिटेशन जैसे अभ्यास तनाव को कम करने में मदद करते हैं। शरीर में पानी की कमी न होने देना भी जरूरी है। कुछ मामलों में डॉक्टर की सलाह से मैग्नीशियम जैसे सप्लीमेंट फायदेमंद हो सकते हैं। जैसे-जैसे हार्मोनल संतुलन सुधरता है, चेहरे की सूजन और बनावट में भी धीरे-धीरे सुधार दिखने लगता है।



