राष्ट्रीय

CyberCrime – जम्मू-कश्मीर में 209 करोड़ का ऑनलाइन निवेश घोटाला उजागर

CyberCrime – जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक बड़े ऑनलाइन निवेश घोटाले का पर्दाफाश किया है, जिसमें शुरुआती जांच में 209 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी सामने आई है। यह मामला गंदरबल जिले के सफापोरा निवासी फिरदौस अहमद मीर की शिकायत के बाद दर्ज किया गया। शिकायत मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक खलील अहमद पॉसवाल के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल गठित किया गया, जिसमें साइबर विशेषज्ञों को शामिल किया गया। जांच आगे बढ़ी तो यह स्पष्ट हुआ कि यह नेटवर्क राज्य की सीमाओं से बाहर तक फैला हुआ था।

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सोशल मीडिया के जरिए रचा गया जाल

जांच में सामने आया कि आरोपियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का सहारा लेकर फर्जी निवेश वेबसाइट और कथित ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म तैयार किए। इन प्लेटफॉर्म पर कम समय में अधिक मुनाफे का दावा किया जाता था, जिससे लोग आकर्षित हो जाते थे। निवेशकों को भरोसा दिलाने के लिए पेशेवर दिखने वाले पोर्टल और मोबाइल इंटरफेस बनाए गए थे।

धोखाधड़ी का तरीका सुनियोजित था। निवेशकों से धनराशि अलग-अलग स्थानीय बैंक खातों में जमा कराई जाती थी। ये खाते मुख्य रूप से बडगाम, श्रीनगर, गंदरबल और बारामूला क्षेत्रों में खोले गए थे। कई मामलों में खाताधारक आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से थे, जिन्हें हर महीने कुछ हजार रुपये का लालच देकर उनके खाते और एटीएम कार्ड का उपयोग किया जाता था।

क्यूआर कोड और बैंक खातों का दुरुपयोग

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से क्यूआर कोड तैयार कर फर्जी वेबसाइट पर अपलोड किए जाते थे। टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग माध्यमों के जरिए नए क्यूआर कोड नियमित रूप से साझा किए जाते थे।

जब किसी खाते में अधिक लेनदेन या शिकायत के कारण साइबर सेल की नजर पड़ती और खाता फ्रीज होता, तो तुरंत नया खाता सक्रिय कर दिया जाता। इस तरह रकम को कई स्तरों पर घुमाया जाता, ताकि धन का स्रोत छिपा रहे। जांच टीम ने अब तक 835 बैंक खातों का डेटा जुटाया है और 290 खातों के लेनदेन की पुष्टि की है। सत्यापित रकम 209 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है, जबकि कुल राशि इससे कहीं अधिक होने की आशंका जताई जा रही है।

अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन और मुख्य आरोपी

पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क के तार विदेशों तक जुड़े मिले हैं। जांच में चीन और फिलीपींस से जुड़े संपर्कों की जानकारी सामने आई है। मामले में अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें हरियाणा के हिसार निवासी एकांत योगदत्त को मुख्य संचालक बताया जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक, उसने फिलीपींस में एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान साइबर धोखाधड़ी से जुड़े तौर-तरीकों को समझा और विदेशी संपर्क विकसित किए। उसे दिल्ली हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया। अन्य गिरफ्तार आरोपी कश्मीर के विभिन्न जिलों से हैं, जिनमें कथित क्षेत्रीय समन्वयक, खातों की व्यवस्था करने वाले लोग और कुछ बैंक कर्मी शामिल हैं।

जांच जारी, संपत्ति जब्ती की प्रक्रिया

पुलिस ने आरोपियों के ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाकर बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं। मनी ट्रेल की विस्तृत जांच जारी है और संदिग्ध संपत्तियों को चिन्हित किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि ठगी की वास्तविक राशि की पुष्टि के लिए वित्तीय दस्तावेजों की गहन पड़ताल की जा रही है।

लोगों से सतर्क रहने की अपील

पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि अधिक रिटर्न के लालच में अनजान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर निवेश न करें। किसी भी परिस्थिति में अपना बैंक खाता या एटीएम कार्ड दूसरों को उपयोग के लिए न दें। यदि कोई संदिग्ध गतिविधि सामने आती है, तो राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल या हेल्पलाइन नंबर 1039 पर तुरंत शिकायत दर्ज कराई जाए।

अधिकारियों का कहना है कि यह मामला साइबर अपराध के बदलते स्वरूप को दर्शाता है, जहां तकनीकी समझ रखने वाले लोग भी अवैध गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं। जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय कर रही हैं।

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