Politics – राष्ट्रपति से मुलाकात का समय न मिलने पर बढ़ा सियासी तनाव
Politics – तृणमूल कांग्रेस के सांसदों द्वारा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के लिए मांगा गया समय फिलहाल मंजूर नहीं किया गया है। जानकारी के अनुसार राष्ट्रपति भवन ने ‘समय की कमी’ का हवाला देते हुए इस अनुरोध को स्वीकार करने में असमर्थता जताई। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के दौरे को लेकर राजनीतिक हलकों में पहले से ही बहस और आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।

प्रतिनिधिमंडल के लिए मांगा गया था समय
सूत्रों के अनुसार तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने 9 मार्च को राष्ट्रपति को पत्र लिखकर मुलाकात का अनुरोध किया था। प्रस्तावित प्रतिनिधिमंडल में लगभग 12 से 15 सदस्य शामिल होने थे। इसमें लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों के साथ राज्य सरकार के कुछ मंत्री भी शामिल किए जाने की योजना थी।
पार्टी का कहना था कि इस बैठक का उद्देश्य पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न सामाजिक और कल्याणकारी कार्यक्रमों की जानकारी राष्ट्रपति तक पहुंचाना था। तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि राज्य सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में कई योजनाएं लागू की हैं, जिनका उद्देश्य समाज के सभी वर्गों के लिए समावेशी विकास सुनिश्चित करना है।
राष्ट्रपति भवन ने दिया आधिकारिक जवाब
राष्ट्रपति भवन की ओर से भेजे गए जवाब में बताया गया कि अनुरोध पर विचार किया गया, लेकिन व्यस्त कार्यक्रम के कारण फिलहाल बैठक के लिए समय तय करना संभव नहीं है। सूत्रों का कहना है कि इसके बाद तृणमूल कांग्रेस ने राष्ट्रपति कार्यालय को एक और पत्र भेजकर अगले सप्ताह के दौरान मुलाकात का नया समय देने का अनुरोध किया है।
हालांकि इस पर अभी तक राष्ट्रपति भवन की ओर से कोई नया निर्णय सामने नहीं आया है। राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को हाल के विवाद से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
राष्ट्रपति के दौरे के बाद शुरू हुआ विवाद
पूरा विवाद उस समय चर्चा में आया जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू हाल ही में उत्तर बंगाल के बागडोगरा क्षेत्र में एक अंतरराष्ट्रीय आदिवासी सम्मेलन में शामिल होने पहुंची थीं। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सम्मेलन में अपेक्षा से कम लोगों की मौजूदगी पर नाराजगी जताई थी।
राष्ट्रपति ने यह भी सवाल उठाया कि कार्यक्रम स्थल को पहले निर्धारित स्थान बिधाननगर से बदलकर बागडोगरा हवाईअड्डे के पास क्यों किया गया। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा था कि क्या प्रशासन को यह उम्मीद थी कि लोग वहां पहुंच नहीं पाएंगे।
अपने संबोधन में उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उनके आगमन के समय हवाईअड्डे पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या राज्य सरकार का कोई मंत्री मौजूद नहीं था। राष्ट्रपति की इस टिप्पणी के बाद राज्य की राजनीति में बहस तेज हो गई।
ममता बनर्जी और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि राष्ट्रपति की टिप्पणी राजनीतिक सलाह के प्रभाव में हो सकती है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि देश के अन्य राज्यों में आदिवासी समुदाय से जुड़े मुद्दों पर राष्ट्रपति ने सार्वजनिक रूप से कम प्रतिक्रिया दी है।
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए राज्य सरकार की आलोचना की। भाजपा नेताओं का कहना है कि संवैधानिक पद पर बैठे राष्ट्रपति के स्वागत में राज्य सरकार की अनुपस्थिति राजनीतिक शिष्टाचार के अनुरूप नहीं थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवैधानिक संस्थाओं के प्रति सम्मान बनाए रखना जरूरी है।
चुनावी माहौल में बढ़ी राजनीतिक गर्मी
इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को और अधिक गरमा दिया है। राज्य में पहले से ही राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज है और आगामी चुनावों को देखते हुए विभिन्न दलों के बीच बयानबाजी बढ़ती जा रही है।
लगातार तीन बार से सत्ता में रही ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस को राज्य में मुख्य विपक्ष के रूप में उभर रही भाजपा से कड़ी चुनौती मिल रही है। ऐसे माहौल में राष्ट्रपति के दौरे से जुड़ा यह विवाद राजनीतिक विमर्श का एक नया मुद्दा बन गया है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए तृणमूल कांग्रेस के नए अनुरोध पर क्या फैसला लिया जाता है और इस पूरे प्रकरण का राज्य की राजनीति पर कितना प्रभाव पड़ता है।



