JioIPO – रिलायंस जियो के आईपीओ की तैयारी तेज, बड़े बैंकों की हुई एंट्री
JioIPO – देश की सबसे बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों में शुमार रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड अब अपनी टेलीकॉम इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स को शेयर बाजार में उतारने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी दिसंबर तिमाही के वित्तीय नतीजों के साथ ही इस महीने के अंत तक ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर सकती है। इस कदम को भारत के कॉर्पोरेट सेक्टर में एक बड़े घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।

बैंकरों की नियुक्ति से प्रक्रिया को मिली रफ्तार
आईपीओ की दिशा में औपचारिक शुरुआत करते हुए कंपनी ने 17 बैंकरों को इस प्रक्रिया से जोड़ा है। यह संकेत देता है कि रिलायंस इस पब्लिक ऑफरिंग को लेकर गंभीरता से काम कर रही है और इसे बड़े स्तर पर सफल बनाने की तैयारी कर रही है। निवेशकों के बीच जियो प्लेटफॉर्म्स पहले से ही एक मजबूत ब्रांड के रूप में स्थापित है, ऐसे में इस आईपीओ को लेकर बाजार में उत्सुकता भी बढ़ती जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय बैंकों की अहम भूमिका
इस प्रस्तावित आईपीओ में वैश्विक स्तर के नौ बड़े बैंकों को सलाहकार के तौर पर शामिल किया गया है। इनमें मॉर्गन स्टेनली, एचएसबीसी, जेपी मॉर्गन, सिटीग्रुप और गोल्डमैन सैक्स जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। इन संस्थानों की भागीदारी से यह साफ संकेत मिलता है कि यह आईपीओ अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को भी आकर्षित कर सकता है और इसका आकार काफी बड़ा हो सकता है।
घरेलू संस्थानों को भी मिली जिम्मेदारी
विदेशी बैंकों के साथ-साथ देश के प्रमुख वित्तीय संस्थानों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है। कोटक महिंद्रा कैपिटल, एक्सिस कैपिटल, जेएम फाइनेंशियल और एसबीआई कैपिटल मार्केट्स जैसे संस्थान इस आईपीओ के घरेलू सलाहकार के रूप में काम करेंगे। इनकी भूमिका निवेशकों तक पहुंच बढ़ाने और ऑफर को सुचारु रूप से संचालित करने में अहम होगी।
सरकारी नियमों में बदलाव से मिला समर्थन
हाल ही में सरकार ने लिस्टिंग से जुड़े नियमों में बदलाव किया है, जिससे बड़ी कंपनियों को अब अपनी केवल 2.5 प्रतिशत हिस्सेदारी ही बाजार में उतारनी होगी। इस बदलाव ने जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को व्यवहारिक और आकर्षक बना दिया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से बड़े कॉर्पोरेट्स को पूंजी जुटाने में आसानी होगी।
सबसे बड़े आईपीओ बनने की संभावना
यह आईपीओ भारत के इतिहास का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम साबित हो सकता है। खास बात यह है कि रिलायंस समूह की किसी बड़ी इकाई का लगभग दो दशक बाद यह पहला आईपीओ होगा। ऐसे में निवेशकों के बीच इसे लेकर काफी उम्मीदें जताई जा रही हैं और बाजार में इसकी चर्चा लगातार बढ़ रही है।
ऑफर फॉर सेल के जरिए शेयर बिक्री की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्तावित आईपीओ में मौजूदा निवेशकों द्वारा अपने हिस्से की कुछ हिस्सेदारी बेचने का विकल्प शामिल हो सकता है, जिसे ऑफर फॉर सेल कहा जाता है। इससे कंपनी को पूंजी जुटाने के साथ-साथ निवेशकों को आंशिक एग्जिट का मौका भी मिलेगा। हालांकि, इस बारे में अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
समय और संरचना पर अंतिम फैसला बाकी
आईपीओ के आकार, समय और संरचना को लेकर अभी कई पहलुओं पर चर्चा जारी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह इश्यू साल के अंत तक बाजार में आ सकता है, लेकिन परिस्थितियों के अनुसार इसमें बदलाव भी संभव है। फिलहाल कंपनी और संबंधित बैंकों की ओर से इस विषय में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे निवेशक अंतिम घोषणा का इंतजार कर रहे हैं।



