AbrahamAccord – ईरान के समझौते में शामिल होने के संकेतों से बढ़ी चर्चा
AbrahamAccord – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने पश्चिम एशिया की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि भविष्य में ईरान भी अब्राहम अकॉर्ड का हिस्सा बन सकता है। उन्होंने खाड़ी देशों के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि क्षेत्रीय कूटनीतिक प्रयासों से नए समीकरण बन रहे हैं और आगे चलकर ईरान की भूमिका भी बदल सकती है।

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच कई मुद्दों पर बैकडोर बातचीत की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। हालांकि तेहरान की ओर से इस दावे पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस बयान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ट्रंप ने खाड़ी देशों का जताया आभार
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट साझा करते हुए मध्य-पूर्व के देशों का धन्यवाद किया। उन्होंने लिखा कि क्षेत्र के देशों ने सहयोग और संवाद को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। इसी दौरान उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में ईरान भी अब्राहम अकॉर्ड से जुड़ सकता है।
ट्रंप के इस बयान को कई राजनीतिक विशेषज्ञ संभावित कूटनीतिक संकेत के रूप में देख रहे हैं। उनका मानना है कि अमेरिका क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए नए विकल्पों पर काम कर रहा है। हालांकि मौजूदा हालात को देखते हुए यह रास्ता आसान नहीं माना जा रहा।
पहले भी कर चुके हैं ऐसा दावा
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने ईरान के अब्राहम अकॉर्ड में शामिल होने की संभावना जताई हो। इससे पहले भी उन्होंने इजरायल और हमास संघर्ष के दौरान युद्धविराम समझौते की चर्चा करते हुए कहा था कि भविष्य में ईरान भी इस समूह का हिस्सा बन सकता है।
उस समय ईरान ने ट्रंप के बयान को पूरी तरह खारिज कर दिया था। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कहा था कि तेहरान इजरायल को मान्यता देने के पक्ष में नहीं है। ईरान लंबे समय से इजरायल के खिलाफ सख्त रुख अपनाता रहा है और फिलिस्तीनी मुद्दे को लेकर खुद को मुखर समर्थक बताता है।
क्या है अब्राहम अकॉर्ड
अब्राहम अकॉर्ड की शुरुआत वर्ष 2020 में अमेरिकी मध्यस्थता के जरिए हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य अरब देशों और इजरायल के बीच संबंध सामान्य करना था। इस समझौते के तहत संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन ने सबसे पहले इजरायल के साथ औपचारिक रिश्ते स्थापित किए थे। बाद में मोरक्को और सूडान भी इस पहल का हिस्सा बने।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस समझौते के जरिए अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में नए रणनीतिक गठबंधन बनाने की कोशिश की थी। इसका एक प्रमुख उद्देश्य क्षेत्र में ईरान के प्रभाव को संतुलित करना भी माना गया।
ईरान और इजरायल के रिश्ते अब भी तनावपूर्ण
ईरान और इजरायल के बीच दशकों से गहरा तनाव बना हुआ है। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद दोनों देशों के संबंध पूरी तरह बदल गए थे। इसके बाद ईरान ने इजरायल विरोधी नीति को अपने विदेश नीति के प्रमुख हिस्से के रूप में अपनाया।
ईरान पर लंबे समय से हमास, हिजबुल्लाह और हूती जैसे समूहों को समर्थन देने के आरोप लगते रहे हैं। वहीं इजरायल और अमेरिका ईरान की क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर लगातार चिंता जताते रहे हैं। ऐसे में मौजूदा परिस्थितियों में ईरान का अब्राहम अकॉर्ड में शामिल होना आसान नहीं माना जा रहा, लेकिन ट्रंप के बयान ने कूटनीतिक चर्चाओं को जरूर तेज कर दिया है।