PresidentVisit – नालंदा समारोह में गैरहाजिरी पर सियासी तकरार तेज
PresidentVisit – बिहार के राजगीर स्थित नालंदा यूनिवर्सिटी में आयोजित दीक्षांत समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी के बावजूद राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कार्यक्रम में शामिल न होने को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष ने इस मुद्दे को उठाते हुए इसे सम्मान और संवैधानिक मर्यादा से जोड़ दिया है, जबकि सत्तापक्ष की ओर से अब तक इस पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

कांग्रेस ने उठाए सवाल, बंगाल प्रकरण से जोड़ा मामला
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के कार्यक्रम में राज्य सरकार की अनुपस्थिति को लेकर भाजपा ने कड़ा रुख अपनाया था, तो अब बिहार के मामले में चुप्पी क्यों है। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति के सम्मान को लेकर राजनीतिक दलों को एक समान दृष्टिकोण रखना चाहिए। उनके बयान में यह संकेत भी था कि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग प्रतिक्रिया देना राजनीतिक दोहरे मापदंड को दर्शाता है।
पप्पू यादव ने भी जताई आपत्ति, भाजपा से किया सवाल
पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने भी इस घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने राष्ट्रपति के प्रति सम्मान जताते हुए पूछा कि जब बिहार में उनके स्वागत के लिए शीर्ष नेतृत्व मौजूद नहीं रहा, तो क्या इसे नजरअंदाज किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पहले इसी तरह के मामलों को लेकर जोरदार राजनीतिक प्रतिक्रिया देने वाले अब खामोश क्यों हैं।
पश्चिम बंगाल के पुराने विवाद की फिर चर्चा
यह पूरा विवाद उस घटना से भी जुड़ गया है, जब मार्च के पहले सप्ताह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में एक कार्यक्रम में शामिल होने गई थीं। उस समय उन्होंने कार्यक्रम स्थल को लेकर नाराजगी जताई थी और यह भी कहा था कि राज्य सरकार की ओर से कोई वरिष्ठ प्रतिनिधि मौजूद नहीं था। इस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई भाजपा नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी और इसे राष्ट्रपति के अपमान से जोड़ा था।
नालंदा समारोह में अंतरराष्ट्रीय भागीदारी
नालंदा यूनिवर्सिटी के इस दीक्षांत समारोह में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई। कुल 31 देशों के 617 छात्रों ने अपनी पढ़ाई पूरी की, जिनमें 197 विदेशी छात्र-छात्राएं शामिल थे। यह विश्वविद्यालय धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है। समारोह में विदेश मंत्री एस जयशंकर, राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन और राज्य सरकार के प्रतिनिधि मंत्री श्रवण कुमार उपस्थित रहे।
शैक्षणिक उपलब्धियों पर राष्ट्रपति का जोर
अपने संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नालंदा यूनिवर्सिटी की ऐतिहासिक विरासत और उसके पुनर्निर्माण को ज्ञान के पुनर्जागरण से जोड़ा। उन्होंने कहा कि यह संस्थान केवल भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक शिक्षा जगत के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। समारोह के दौरान 10 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि दी गई, जबकि 36 छात्रों को विभिन्न विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।
राजनीतिक और शैक्षणिक विमर्श का मेल
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखाया है कि कैसे शैक्षणिक मंच भी राजनीतिक बहस का केंद्र बन जाते हैं। जहां एक ओर विश्वविद्यालय की उपलब्धियां और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी चर्चा में हैं, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना बनी हुई है।