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बिज़नेस

LPGPrice – एलपीजी दरें स्थिर, विदेश से सप्लाई पहुंचने से दिखे राहत के संकेत

LPGPrice – देशभर में 2 अप्रैल को एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। तेल कंपनियों ने आज भी घरेलू और कमर्शियल गैस के दाम यथावत रखे हैं। इस बीच एक सकारात्मक खबर यह है कि विदेश से एलपीजी की नई खेप भारत पहुंच चुकी है, जिससे आपूर्ति को लेकर बनी चिंता कुछ हद तक कम होने की उम्मीद है।

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विदेश से पहुंचे गैस टैंकर, सप्लाई को सहारा
संयुक्त अरब अमीरात से एलपीजी लेकर आए दो बड़े टैंकर सुरक्षित रूप से भारत पहुंच गए हैं। इनमें से एक टैंकर मुंबई पहुंचा, जो भारत पेट्रोलियम के लिए गैस लेकर आया है, जबकि दूसरा जहाज न्यू मैंगलोर के पास पहुंचा है और यह हिंदुस्तान पेट्रोलियम के लिए आपूर्ति लेकर आया है। इन टैंकरों के सुरक्षित आगमन से बाजार में गैस की उपलब्धता को लेकर राहत के संकेत मिले हैं।

बड़े शहरों में एलपीजी की मौजूदा कीमतें
देश के विभिन्न शहरों में एलपीजी सिलेंडर की कीमतें अलग-अलग बनी हुई हैं। दिल्ली में घरेलू सिलेंडर लगभग 913 रुपये में मिल रहा है, जबकि लखनऊ में यह करीब 950 रुपये के आसपास है। पटना में घरेलू गैस का दाम 1000 रुपये से अधिक है, जो प्रमुख शहरों में सबसे ज्यादा में से एक है। मुंबई, जयपुर और बेंगलुरु जैसे शहरों में भी कीमतें 900 रुपये से ऊपर बनी हुई हैं। कमर्शियल सिलेंडर की दरें इससे कहीं अधिक हैं और कई शहरों में 2000 रुपये से ऊपर पहुंच चुकी हैं।

उद्योगों पर गैस की कीमतों का असर
एलपीजी की कीमतों और सप्लाई से जुड़े हालात का असर औद्योगिक क्षेत्रों में भी देखा जा रहा है। गुजरात के साणंद औद्योगिक क्षेत्र में गैस की महंगाई और सीमित आपूर्ति के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि उत्पादन में करीब 20 प्रतिशत तक गिरावट आई है, खासकर उन इकाइयों में जो गैस आधारित प्रक्रियाओं पर निर्भर हैं।

निर्माण और इंजीनियरिंग सेक्टर में परेशानी
वेल्डिंग, कटिंग और अन्य गैस आधारित कार्यों में लगे उद्योगों को सबसे अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन इकाइयों में काम की रफ्तार धीमी हो गई है और लागत बढ़ने से व्यवसायिक दबाव भी बढ़ा है। उद्योग संगठनों का कहना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर रोजगार और निवेश पर भी पड़ सकता है।

वैश्विक हालात का दिख रहा असर
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी एक रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैस की कीमतों और सप्लाई पर दबाव बना हुआ है। इसका असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर भी पड़ रहा है। हालांकि, अभी देश में मांग स्थिर बनी हुई है, जिससे स्थिति पूरी तरह संकटपूर्ण नहीं हुई है।

आगे की स्थिति पर नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात में जल्द सुधार नहीं होता है, तो आने वाले समय में गैस की कीमतों और आपूर्ति दोनों पर असर पड़ सकता है। फिलहाल सरकार और कंपनियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और सप्लाई को संतुलित रखने की कोशिश कर रही हैं।

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