GuideMovie – देव आनंद ने पहले ठुकराया था फिल्म ‘गाइड’ का यह मशहूर गाना
GuideMovie – हिंदी सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में गिनी जाने वाली ‘गाइड’ आज भी अपने गीत-संगीत और कहानी के लिए याद की जाती है। हालांकि रिलीज के शुरुआती दिनों में फिल्म को उम्मीद के मुताबिक प्रतिक्रिया नहीं मिली थी, लेकिन समय के साथ यह बड़ी हिट साबित हुई। फिल्म के गाने आज भी संगीत प्रेमियों की पसंद बने हुए हैं। कम लोग जानते हैं कि फिल्म का एक बेहद लोकप्रिय गीत ऐसा भी था, जिसे खुद देव आनंद ने शुरुआत में पसंद नहीं किया था।

एसडी बर्मन के बिना फिल्म नहीं बनाना चाहते थे देव आनंद
‘गाइड’ के संगीत की जिम्मेदारी मशहूर संगीतकार एसडी बर्मन को दी गई थी। बताया जाता है कि देव आनंद इस बात को लेकर पूरी तरह स्पष्ट थे कि फिल्म का संगीत वही तैयार करेंगे। इसी बीच एसडी बर्मन की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें हार्ट अटैक आया। डॉक्टरों ने उन्हें आराम की सलाह दी, लेकिन देव आनंद ने किसी दूसरे संगीतकार के साथ काम करने से इनकार कर दिया।
बताया जाता है कि फिल्म की शूटिंग करीब छह महीने तक टाल दी गई ताकि एसडी बर्मन पूरी तरह स्वस्थ होकर काम कर सकें। अभिनेता उनसे मिलने अस्पताल भी पहुंचे थे और उन्होंने भरोसा दिलाया था कि फिल्म का संगीत किसी और को नहीं दिया जाएगा। इस घटना का जिक्र फिल्मी दुनिया से जुड़ी कई किताबों और चर्चाओं में किया जाता है।
अस्पताल में तैयार हुआ फिल्म का संगीत
बीमारी के बावजूद एसडी बर्मन फिल्म को लेकर गंभीर थे। कहा जाता है कि उन्होंने अस्पताल में रहते हुए ही गानों की धुन तैयार करनी शुरू कर दी थी। कुछ ही दिनों में उन्होंने फिल्म के अधिकांश गीतों का संगीत तैयार कर लिया। ‘गाता रहे मेरा दिल’, ‘पिया तोसे नैना लागे रे’, ‘दिन ढल जाए’ और ‘आज फिर जीने की तमन्ना है’ जैसे गीत बाद में फिल्म संगीत की पहचान बन गए।
इन गीतों को शैलेंद्र ने लिखा था और संगीत की सादगी के साथ गहराई ने उन्हें अलग पहचान दिलाई। हालांकि इन सबके बीच एक गाना ऐसा था, जिस पर देव आनंद पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे।
‘आज फिर जीने की तमन्ना है’ पर था संदेह
बताया जाता है कि ‘आज फिर जीने की तमन्ना है’ गीत देव आनंद को शुरुआत में खास पसंद नहीं आया था। उन्हें लगा था कि यह गाना फिल्म के बाकी गीतों जितना प्रभावशाली नहीं है। हालांकि रिकॉर्डिंग पूरी हो चुकी थी, लेकिन उन्होंने इसे फिल्म से हटाने का विचार बना लिया था।
फिल्म की यूनिट के कई सदस्यों को यह गीत बेहद पसंद आया। निर्देशक विजय आनंद ने सुझाव दिया कि पहले इसे फिल्माया जाए, बाद में जरूरत पड़ने पर हटाया जा सकता है। इसके बाद गाने की शूटिंग शुरू हुई और धीरे-धीरे इसका असर सेट पर दिखने लगा।
सेट पर लोगों की पसंद बना यह गीत
शूटिंग के दौरान यूनिट के सदस्य लगातार यही गाना गुनगुनाने लगे। देव आनंद ने भी महसूस किया कि लोगों के बीच यह गीत तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसी के बाद उन्होंने अपना फैसला बदला और गीत को फिल्म में बनाए रखने की मंजूरी दे दी।
फिल्म रिलीज होने के बाद यही गीत दर्शकों के बीच सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले गानों में शामिल हो गया। समय के साथ यह हिंदी सिनेमा के सदाबहार गीतों में गिना जाने लगा। आज भी यह गाना पुराने संगीत प्रेमियों की प्लेलिस्ट का अहम हिस्सा बना हुआ है।