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Fuel – तेल संकट के बीच नेताओं ने बदली यात्रा और कामकाज की शैली

Fuel – ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल से कई देशों की अर्थव्यवस्था दबाव में है और भारत भी इससे अछूता नहीं है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल और डीजल का सीमित उपयोग करने की अपील की है। उनकी इस अपील के बाद कई राज्यों की सरकारें, मंत्री, न्यायपालिका से जुड़े लोग और अधिकारी खुद उदाहरण पेश करते नजर आ रहे हैं।

fuel crisis leaders shift to public transport

देश के अलग-अलग हिस्सों में नेताओं और सरकारी अधिकारियों ने अपने वाहन उपयोग में कटौती शुरू कर दी है। कहीं सरकारी काफिले छोटे किए जा रहे हैं तो कहीं सार्वजनिक परिवहन और कारपूलिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। कई जगहों पर यह पहल प्रतीकात्मक होने के साथ-साथ ईंधन बचत के व्यावहारिक प्रयास के रूप में भी देखी जा रही है।

नेताओं ने अपनाए वैकल्पिक साधन

उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। उन्होंने सरकारी काफिले की जगह स्कूटर से सचिवालय जाना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह केवल औपचारिक कदम नहीं बल्कि राष्ट्रीय हित में लिया गया निर्णय है। इसी तरह मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस द्वारकाधीश बंसल साइकिल से अदालत पहुंचे, जिसकी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर तेजी से साझा की गईं।

इन घटनाओं को सरकार की उस कोशिश से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें आम लोगों को ईंधन की बचत के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है।

दिल्ली सरकार ने घटाईं सरकारी गाड़ियां

प्रधानमंत्री की अपील के बाद दिल्ली सरकार ने भी बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि मंत्रियों, विधायकों और सरकारी अधिकारियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली गाड़ियों की संख्या सीमित की जाएगी। सरकार ने कारपूलिंग और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को प्राथमिकता देने की बात कही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए ईंधन बचत अब केवल सरकारी नीति नहीं बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी बन चुकी है। सरकार का मानना है कि यदि जनप्रतिनिधि खुद उदाहरण पेश करेंगे तो आम लोग भी इस दिशा में जागरूक होंगे।

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में भी सख्ती

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी अपने काफिले में वाहनों की संख्या कम कर दी है। जानकारी के अनुसार अब उनके काफिले में पहले की तुलना में कम गाड़ियां शामिल होंगी। साथ ही मंत्रियों से भी यात्राओं के दौरान कम से कम वाहन उपयोग करने को कहा गया है। राज्य सरकार ने सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया है।

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों और मंत्रियों के काफिलों में तुरंत प्रभाव से कटौती के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार ने अनावश्यक वाहनों को हटाने और मेट्रो, बस तथा पीएनजी जैसे विकल्पों के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही है। इसके अलावा कुछ विभागों में घर से काम करने की व्यवस्था को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

महाराष्ट्र सरकार ने बदले यात्रा नियम

महाराष्ट्र सरकार ने भी ईंधन बचत को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब सरकारी विमानों और हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल केवल आपात स्थिति या सुरक्षा कारणों से ही किया जाएगा। जिला स्तर की बैठकों और दौरों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और रेलवे यात्रा को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार का अनुमान है कि इन फैसलों से ईंधन पर होने वाले सरकारी खर्च में बड़ी कमी आ सकती है। साथ ही यह कदम ऊर्जा संकट के समय जिम्मेदार प्रशासनिक व्यवहार के तौर पर भी देखा जा रहा है।

केंद्र सरकार के विभागों में भी बदलाव

केंद्र सरकार के कई मंत्रालयों ने भी ईंधन और बिजली बचत के लिए नई व्यवस्था लागू करनी शुरू कर दी है। कुछ विभागों में कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दी गई है ताकि यात्रा से होने वाले ईंधन खर्च को कम किया जा सके। सरकारी दफ्तरों में बिजली उपयोग को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।

सरकार की कोशिश है कि इन उपायों के जरिए जनता तक यह संदेश पहुंचे कि मौजूदा वैश्विक हालात में ऊर्जा संरक्षण केवल विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुका है।

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