Corruption – मुआवजे के बदले रिश्वत के आरोपों में घिरा कानपुर विकास प्राधिकरण
Corruption – कानपुर विकास प्राधिकरण एक बार फिर विवादों में घिर गया है। न्यू कानपुर सिटी परियोजना के तहत जमीन अधिग्रहण से जुड़े एक मामले में किसान ने रिश्वत लेने के गंभीर आरोप लगाए हैं। गंगपुर गांव के किसान मनोज राठौर का कहना है कि उनकी जमीन के बदले मिलने वाले मुआवजे के लिए उनसे लाखों रुपये की अवैध वसूली की गई। आरोप है कि 1.39 करोड़ रुपये के मुआवजे के एवज में उनसे 12 लाख रुपये घूस के तौर पर लिए गए, लेकिन बाद में न तो रकम वापस मिली और न ही जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हुई।

यह मामला फरवरी 2025 का बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी न्यू कानपुर सिटी परियोजना के लिए किसानों को बाजार दर से कई गुना अधिक मुआवजा देने का प्रस्ताव रखा गया था। इसी योजना के तहत मनोज राठौर ने अपनी एक बीघा जमीन प्राधिकरण को दी थी।
जांच के बाद भी नहीं मिला समाधान
किसान का आरोप है कि शिकायत के बाद जांच तो शुरू हुई, लेकिन कार्रवाई सीमित स्तर तक ही रह गई। मामले में केवल एक अमीन को निलंबित किया गया था, जबकि बाद में उसे बहाल भी कर दिया गया। मनोज राठौर का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर रिश्वत की मांग केवल एक कर्मचारी अपने दम पर नहीं कर सकता।
उनका दावा है कि पैसे मांगने के दौरान यह कहा गया था कि रकम कई अधिकारियों तक पहुंचानी है। हालांकि किन अधिकारियों का नाम लिया गया, इसकी जानकारी उन्हें नहीं दी गई। किसान का आरोप है कि पिछले कई महीनों से वह न्याय के लिए प्राधिकरण के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
मुआवजे के लिए छह महीने तक इंतजार
मनोज राठौर के अनुसार, जमीन का मुआवजा मिलने में भी काफी देरी की गई। उनका कहना है कि लगातार छह महीने तक उन्हें अलग-अलग कारण बताकर इंतजार कराया गया। आरोप है कि पहली किश्त के बाद अतिरिक्त रकम की मांग भी की गई थी।
किसान ने बताया कि तत्कालीन अधिकारियों से शिकायत करने के बाद जांच शुरू हुई, जिसके बाद उन्हें मुआवजे की राशि मिली। हालांकि रिश्वत के तौर पर दिए गए 12 लाख रुपये अब तक वापस नहीं हुए। उन्होंने यह भी कहा कि मुआवजे की प्रक्रिया के दौरान बार-बार अधिकारियों के हस्ताक्षर और फाइल अटकने की बात कही जाती थी।
बैंक खाते के जरिए रकम जाने का दावा
मनोज राठौर का कहना है कि उन्होंने अपने बैंक खाते का विवरण निकलवाया तो पता चला कि रकम एक व्यक्ति के खाते में भेजी गई थी। उनका आरोप है कि आज तक जांच टीम ने उनका आधिकारिक बयान तक दर्ज नहीं किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस खाते में पैसे गए, उससे पूछताछ क्यों नहीं हुई और उस व्यक्ति का प्राधिकरण के कर्मचारियों से क्या संबंध था।
इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भी कई सवाल उठ रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि यदि शिकायत दर्ज होने के बाद भी जांच अधूरी रही तो इसके पीछे वजह क्या है और आखिर किसे बचाने की कोशिश की जा रही है।
प्राधिकरण ने मांगी जानकारी
विवाद बढ़ने के बाद कानपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अंकुर कौशिक ने कहा है कि वह मामले की जानकारी लेकर जांच करेंगे। उनका कहना है कि फिलहाल उन्हें इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जानकारी नहीं है, लेकिन संबंधित दस्तावेज देखने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल किसान न्याय और अपनी रकम वापस मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं। वहीं यह मामला सरकारी परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी कई सवाल खड़े कर रहा है।