बिहार

PrisonReform – बिहार की जेलों में कैदी संभालेंगे पेट्रोल पंप संचालन

PrisonReform – बिहार सरकार जेल सुधार और कैदियों के पुनर्वास को लेकर एक नई योजना पर काम कर रही है। प्रस्ताव के अनुसार राज्य की जेल परिसरों में खाली पड़ी जमीन पर पेट्रोल पंप स्थापित किए जाएंगे और इनके संचालन की जिम्मेदारी चयनित कैदियों को सौंपी जाएगी। गृह विभाग के कारा प्रभाग ने इस योजना का प्रारूप तैयार कर लिया है और इसे आगे की मंजूरी के लिए वित्त विभाग को भेजा गया है।

bihar jail inmates petrol pump plan

सरकारी स्तर पर प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस योजना को लागू किया जाएगा। जानकारी के मुताबिक, अंतिम मंजूरी मिलने के बाद कारा विभाग पेट्रोलियम कंपनियों के साथ समझौता करेगा। प्रारंभिक स्तर पर हिन्दुस्तान पेट्रोलियम के साथ सहयोग की तैयारी की गई है। योजना का उद्देश्य कैदियों को रोजगार आधारित प्रशिक्षण देना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना बताया जा रहा है।

सुधार प्रक्रिया में शामिल कैदियों को मिलेगा मौका

कारा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पेट्रोल पंप संचालन की जिम्मेदारी केवल उन्हीं कैदियों को दी जाएगी जो जेलों में चल रहे सुधार कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से शामिल हैं। गंभीर अपराधों में बंद या हिंसक प्रवृत्ति वाले कैदियों को इस योजना से दूर रखा जाएगा। विभाग का मानना है कि इससे उन कैदियों को नई दिशा मिलेगी जो सजा के दौरान अपने व्यवहार और कार्यशैली में सुधार दिखा चुके हैं।

इसके साथ ही पेट्रोल पंपों पर होने वाले लेनदेन और बिक्री की निगरानी के लिए अलग व्यवस्था भी तैयार की जाएगी। विभाग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि संचालन पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से हो। इसके लिए जेल प्रशासन और संबंधित कंपनी के अधिकारियों की संयुक्त निगरानी की व्यवस्था बनाई जा सकती है।

राज्य की जेलों में क्षमता से अधिक कैदी

बिहार की जेलों में वर्तमान समय में कैदियों की संख्या निर्धारित क्षमता से काफी अधिक है। राज्य में आठ केंद्रीय कारागार सहित कुल 59 जेलें हैं, जिनकी कुल क्षमता लगभग 47 हजार कैदियों की है। हालांकि मौजूदा समय में यहां 60 हजार से अधिक कैदी बंद हैं। ऐसे में सरकार लंबे समय से जेलों के भीतर सुधारात्मक और कौशल आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है।

जेल प्रशासन पहले से ही योग, ध्यान, हस्तशिल्प और उत्पादन कार्यों जैसे कार्यक्रम चला रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इस नई योजना से कैदियों में आत्मनिर्भरता की भावना विकसित होगी और रिहाई के बाद उन्हें रोजगार से जुड़ने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि सुधारात्मक गतिविधियां अपराध की पुनरावृत्ति कम करने में सहायक साबित हो सकती हैं।

काम के बदले मिलेगा पारिश्रमिक

पेट्रोल पंप संचालन से जुड़े कैदियों को जेल मैनुअल के अनुसार पारिश्रमिक भी दिया जाएगा। फिलहाल बिहार की जेलों में विभिन्न कार्यों में लगे कैदियों को उनके कौशल और कार्य की श्रेणी के हिसाब से भुगतान किया जाता है। अकुशल कार्य करने वाले कैदियों को कम राशि जबकि कुशल श्रेणी में आने वालों को अधिक भुगतान मिलता है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्तमान व्यवस्था में कैदियों को प्रतिदिन 147 रुपये से लेकर लगभग 397 रुपये तक का भुगतान किया जाता है। यह भुगतान कार्य की प्रकृति और दक्षता के आधार पर तय होता है। नई योजना लागू होने के बाद पेट्रोल पंप संचालन में शामिल कैदियों को भी इसी व्यवस्था के तहत पारिश्रमिक दिए जाने की संभावना है।

पुनर्वास मॉडल के रूप में देखी जा रही योजना

कारा विभाग इस पहल को केवल रोजगार योजना नहीं बल्कि पुनर्वास मॉडल के रूप में देख रहा है। अधिकारियों का मानना है कि यदि कैदियों को जिम्मेदारी और काम का अवसर दिया जाए तो उनमें सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। सरकार की कोशिश है कि जेलों को केवल दंड स्थल नहीं बल्कि सुधार केंद्र के रूप में विकसित किया जाए।

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