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CBI – चयन प्रक्रिया से अलग हुए राहुल, निष्पक्षता पर उठाए सवाल

CBI – लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने नए सीबीआई निदेशक के चयन से खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अपनी असहमति दर्ज कराई है। राहुल गांधी ने कहा कि वह ऐसी किसी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बन सकते, जिसे वह निष्पक्ष नहीं मानते। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विपक्ष के नेता की भूमिका केवल औपचारिक सहमति देने तक सीमित नहीं हो सकती।

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राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के जरिए अपने फैसले की जानकारी सार्वजनिक की। उन्होंने लिखा कि किसी भी पक्षपातपूर्ण प्रक्रिया में शामिल होना उनके संवैधानिक दायित्वों के खिलाफ होगा। उनके इस कदम के बाद राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है।

तीन सदस्यीय समिति करती है चयन

सीबीआई निदेशक की नियुक्ति एक उच्चस्तरीय समिति के जरिए की जाती है। इस समिति की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं, जबकि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश या उनके द्वारा नामित सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश इसमें सदस्य होते हैं।

मंगलवार को इसी प्रक्रिया के तहत प्रधानमंत्री आवास पर बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और राहुल गांधी मौजूद थे। हालांकि कुछ समय बाद राहुल गांधी बैठक से बाहर निकल गए और बाद में उनका पत्र सामने आया।

पहले भी जता चुके हैं असहमति

यह पहला मौका नहीं है जब राहुल गांधी ने किसी चयन समिति की प्रक्रिया से दूरी बनाई हो। इससे पहले मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति के दौरान भी उन्होंने खुद को प्रक्रिया से अलग कर लिया था। उस समय भी उन्होंने पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए थे।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि विपक्ष की भूमिका को केवल औपचारिकता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। पार्टी का मानना है कि संवैधानिक संस्थाओं की नियुक्तियों में व्यापक सहमति और पारदर्शिता जरूरी है।

नए निदेशक की नियुक्ति की तैयारी

वर्तमान सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद का कार्यकाल इसी महीने समाप्त होने जा रहा है। उन्होंने मई 2023 में पदभार संभाला था। बाद में सरकार ने उनके कार्यकाल को एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया था। अब नए निदेशक की नियुक्ति की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।

सूत्रों के मुताबिक सरकार ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की एक सूची तैयार की है, जिनमें कई प्रमुख नाम शामिल हैं। संभावित उम्मीदवारों में विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों और राज्यों में कार्यरत वरिष्ठ अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज

राहुल गांधी के इस फैसले के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आने लगी है। कांग्रेस इसे संस्थागत पारदर्शिता से जुड़ा मुद्दा बता रही है, जबकि भाजपा नेताओं का कहना है कि चयन प्रक्रिया कानून के तहत तय नियमों के अनुसार ही चलती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी का यह कदम केवल नियुक्ति प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि वह इसके जरिए संस्थागत स्वतंत्रता और विपक्ष की भूमिका पर बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं।

फिलहाल सभी की नजर केंद्र सरकार द्वारा घोषित किए जाने वाले अगले सीबीआई निदेशक के नाम पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में इस नियुक्ति को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

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