Bulldozer – हुमायूं कबीर ने बुलडोजर कार्रवाई और वंदे मातरम का किया समर्थन
Bulldozer – पश्चिम बंगाल की राजनीति में हाल के दिनों में लगातार सुर्खियों में रहे विधायक हुमायूं कबीर ने एक बार फिर अपने बयानों से नई बहस छेड़ दी है। तृणमूल कांग्रेस से अलग होने के बाद अपनी नई पार्टी AJUP यानी आम जनता उन्नयन पार्टी बनाने वाले कबीर ने बुलडोजर कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त कदम उठाना गलत नहीं है। साथ ही उन्होंने ‘वंदे मातरम’ के नारे को लेकर भी खुलकर अपनी राय रखी।

ममता बनर्जी पर साधा निशाना
हुमायूं कबीर ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हालिया कोर्ट दौरे को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद हिंसा के मुद्दे पर अब अदालत जाना केवल राजनीतिक संदेश देने की कोशिश है। कबीर के मुताबिक, राज्य में पहले भी चुनावी हिंसा हुई थी और उस समय सरकार की भूमिका पर सवाल उठे थे।
उन्होंने कहा कि वर्तमान हालात को लेकर जिस तरह अदालत का रुख किया जा रहा है, उससे राजनीतिक लाभ मिलने की संभावना कम है। कबीर ने आरोप लगाया कि जनता अब केवल बयानों से प्रभावित नहीं होती और राजनीतिक दलों को ज़मीनी मुद्दों पर जवाब देना होगा।
वंदे मातरम पर साफ रुख
वंदे मातरम के मुद्दे पर भी कबीर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस नारे से किसी को परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने इसे देश की पहचान से जुड़ा बताया और कहा कि यह वर्षों से लोगों की भावना का हिस्सा रहा है।
कबीर ने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों और नारों को राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, देशभक्ति से जुड़े मुद्दों पर समाज को विभाजित करने के बजाय संतुलित दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है।
अवैध निर्माण पर बुलडोजर कार्रवाई का समर्थन
AJUP नेता ने बुलडोजर कार्रवाई को लेकर कहा कि जहां भी गैरकानूनी निर्माण होंगे, वहां प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति कानून के खिलाफ गतिविधियों में शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कदम उठाने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
कबीर ने दावा किया कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासनिक कार्रवाई जरूरी है। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ऐसी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत और निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए ताकि किसी तरह का विवाद पैदा न हो।
दो सीटों से जीत के बाद नई रणनीति
हालिया विधानसभा चुनाव में हुमायूं कबीर ने नौदा और रेजीनगर दोनों सीटों पर जीत दर्ज की थी। अब उन्होंने संकेत दिया है कि वह रेजीनगर सीट छोड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस्तीफा देने के बाद इस सीट से उनके बेटे को उम्मीदवार बनाया जाएगा।
कबीर ने भरोसा जताया कि उनके बेटे को क्षेत्र की जनता का समर्थन मिलेगा और वह बड़ी जीत हासिल कर सकता है। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में परिवारवाद और राजनीतिक उत्तराधिकार को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
कोर्ट में ममता बनर्जी की मौजूदगी पर विवाद
गुरुवार को ममता banerjee कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचीं, जहां उन्होंने वकीलों जैसा काला कोट पहना हुआ था। इस तस्वीर के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रिया तेज हो गई। विपक्षी नेताओं ने इसे राजनीतिक प्रदर्शन बताया, जबकि कुछ कानूनी विशेषज्ञों ने भी इस पर सवाल उठाए।
बार काउंसिल ने इस मामले में रिपोर्ट मांगी है। वहीं सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू ने भी इस पर टिप्पणी करते हुए नाराजगी जाहिर की। अदालत परिसर में मौजूद कुछ वकीलों ने ममता बनर्जी के खिलाफ नारेबाजी भी की, जिससे माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गया।
अदालत परिसर में बढ़ा राजनीतिक तनाव
तृणमूल कांग्रेस की ओर से दावा किया गया कि अदालत परिसर में कुछ वकीलों ने जानबूझकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। पार्टी नेताओं का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री को सुरक्षित बाहर निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
दूसरी ओर विपक्षी दलों का आरोप है कि अदालत जैसे संवेदनशील स्थान को राजनीतिक मंच नहीं बनाया जाना चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में पहले से जारी टकराव को और तेज कर दिया है।