Monsoon – अंडमान पहुंचा मानसून, केरल में समय से पहले दस्तक के दिखे संकेत…
Monsoon – भारत मौसम विज्ञान विभाग ने दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति को लेकर नई जानकारी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार, मानसून ने दक्षिण-पूर्व अरब सागर, अंडमान सागर, निकोबार द्वीप समूह और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में प्रवेश कर लिया है। विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में मानसून और तेजी से आगे बढ़ सकता है।

आईएमडी के मुताबिक, अंडमान क्षेत्र में बारिश और बादलों की गतिविधि लगातार बढ़ रही है। विजयपुरम समेत आसपास के इलाकों में मौसम में बड़ा बदलाव देखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री हवाओं और वातावरणीय परिस्थितियों के अनुकूल होने से मानसून की गति इस बार सामान्य से तेज बनी हुई है।
केरल में जल्दी पहुंच सकता है मानसून
मौसम विभाग ने संभावना जताई है कि इस बार मानसून केरल में तय समय से पहले दस्तक दे सकता है। अनुमान के अनुसार, 26 मई के आसपास केरल में मानसून पहुंचने की संभावना है, जबकि सामान्य तौर पर इसकी एंट्री 1 जून के करीब होती है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बन रही अनुकूल परिस्थितियों ने मानसून को तेजी से आगे बढ़ने में मदद की है। पिछले कुछ दिनों में अंडमान-निकोबार क्षेत्र में तेज हवाएं, लगातार बारिश और घने बादल सक्रिय रहे हैं, जो मानसून की प्रगति के लिए सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं।
कई राज्यों में भारी बारिश का अनुमान
आईएमडी ने देश के कई हिस्सों में भारी बारिश और तेज आंधी की संभावना जताई है। पूर्वोत्तर भारत, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, सिक्किम, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी और कर्नाटक में अगले कुछ दिनों तक तेज बारिश हो सकती है।
कुछ क्षेत्रों में बहुत भारी वर्षा की चेतावनी भी जारी की गई है। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। समुद्र तटीय इलाकों में मछुआरों को भी मौसम की स्थिति पर नजर बनाए रखने को कहा गया है।
कई हिस्सों में अब भी जारी है लू
जहां एक ओर दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में बारिश की संभावना बढ़ रही है, वहीं उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कई इलाकों में गर्मी का प्रकोप बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार, कई शहरों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर दर्ज किया गया है।
महाराष्ट्र के अमरावती में तापमान 45.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो इस सीजन के सबसे अधिक तापमानों में शामिल है। राजस्थान, मध्य प्रदेश और विदर्भ के कुछ हिस्सों में भी लू जैसी स्थिति बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की प्रगति के साथ इन इलाकों में भी धीरे-धीरे राहत मिलने की उम्मीद है।
अल नीनो पर भी बनी हुई नजर
मौसम विशेषज्ञ इस वर्ष अल नीनो की संभावित स्थिति पर भी नजर बनाए हुए हैं। विश्व मौसम संगठन और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने संकेत दिए हैं कि मई से जुलाई के बीच अल नीनो विकसित हो सकता है। ऐसी स्थिति में सामान्य से कम बारिश की आशंका रहती है।
हालांकि, फिलहाल मानसून की शुरुआती प्रगति को सकारात्मक माना जा रहा है। कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि समय पर बारिश होने से खरीफ फसलों की बुवाई बेहतर तरीके से हो सकेगी। भारत की बड़ी आबादी खेती और जल संसाधनों के लिए मानसूनी बारिश पर निर्भर रहती है, इसलिए मानसून की हर गतिविधि पर लगातार नजर रखी जा रही है।