GoldPolicy – सोना खरीद रोकने की अपील पर तेज हुई सियासी बहस
GoldPolicy – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से लोगों से एक वर्ष तक सोना न खरीदने की अपील के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया कि इस तरह के फैसलों से छोटे कारोबारियों और पारंपरिक सुनार समुदाय पर गंभीर असर पड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसी नीतियां बनाई जा रही हैं, जिससे स्थानीय ज्वेलरी कारोबार कमजोर हो जाएगा।

कारोबारियों के भविष्य को लेकर जताई चिंता
अखिलेश यादव ने कहा कि पहले से ही बड़े कॉरपोरेट समूहों के बढ़ते प्रभाव के कारण छोटे सुनार प्रतिस्पर्धा में संघर्ष कर रहे हैं। उनके अनुसार यदि लंबे समय तक सोने की खरीद प्रभावित रहती है तो हजारों छोटे व्यापारी और कारीगर आर्थिक संकट में फंस सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े ब्रांडेड शोरूम धीरे-धीरे छोटे शहरों तक अपना नेटवर्क बढ़ाकर बाजार पर नियंत्रण स्थापित करना चाहते हैं। सपा प्रमुख ने कहा कि इससे पारंपरिक स्वर्णकार समाज की रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा और स्थानीय रोजगार भी प्रभावित होंगे।
सोना बाजार में दिखा असर
प्रधानमंत्री की अपील के बाद कई शहरों में सर्राफा कारोबारियों के बीच चिंता का माहौल देखा गया। लखनऊ, वाराणसी और मेरठ समेत कई प्रमुख बाजारों में व्यापारियों ने विरोध प्रदर्शन किए। कुछ स्थानों पर दुकानदारों ने सांकेतिक रूप से कारोबार बंद रखकर अपनी नाराजगी भी जताई। मेरठ जैसे बड़े ज्वेलरी बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही कम होने की बात सामने आई है। व्यापारियों का कहना है कि खरीदारी रुकने से सबसे ज्यादा असर कारीगरों और छोटे दुकानदारों पर पड़ रहा है, जिनकी आय रोजाना के काम पर निर्भर करती है।
वकीलों पर कार्रवाई को लेकर भी सरकार पर निशाना
अखिलेश यादव ने लखनऊ में वकीलों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी राज्य सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए अधिवक्ताओं के चैंबर हटाना और प्रदर्शन कर रहे वकीलों पर बल प्रयोग करना गलत है। उनके अनुसार न्याय व्यवस्था से जुड़े लोगों के साथ इस तरह का व्यवहार चिंता का विषय है। सपा प्रमुख ने कहा कि यदि अधिवक्ता ही असुरक्षित महसूस करेंगे तो आम नागरिकों का भरोसा भी प्रभावित होगा।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच बढ़ी चर्चा
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि सरकार अवैध निर्माणों के नाम पर चुनिंदा कार्रवाई कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक हितों के अनुसार अलग-अलग मानदंड अपनाए जा रहे हैं। सपा प्रमुख ने कहा कि अधिवक्ता समुदाय अब विभिन्न भवनों और प्रतिष्ठानों की वैधता की जानकारी जुटाने की तैयारी कर रहा है। साथ ही उन्होंने लाठीचार्ज में घायल वकीलों के उपचार और मुआवजे की मांग भी उठाई।
सर्राफा बाजार से जुड़े संगठनों का कहना है कि सरकार को किसी भी आर्थिक अपील से पहले छोटे व्यापारियों और कारीगरों की स्थिति पर भी विचार करना चाहिए। उनका मानना है कि यदि बाजार में लंबे समय तक अनिश्चितता बनी रही तो इसका असर रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों पर पड़ सकता है। फिलहाल इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और व्यापारिक संगठनों की नजर सरकार की अगली रणनीति पर टिकी हुई है।