बिहार

Healthcare – बिहार के सरकारी अस्पतालों में जवाबदेही बढ़ाने की तैयारी

Healthcare – बिहार सरकार ने सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली में सुधार और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक जवाबदेह बनाने की दिशा में बड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग अब राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक प्रणाली लागू करने जा रहा है। इसके तहत चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों को तय रोस्टर के अनुसार ड्यूटी पर मौजूद रहना होगा और नियमित रूप से बायोमेट्रिक हाजिरी दर्ज करनी पड़ेगी।

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स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता पर जोर

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता सुधारने और मरीजों को बेहतर सुविधा देने के लिए निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। डॉक्टरों को अनावश्यक रूप से मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर करने से बचने और तय मानक संचालन प्रक्रिया का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही अस्पतालों में उपलब्ध जांच और इलाज की सुविधाएं मरीजों को वहीं मुहैया कराने पर भी जोर दिया गया है।

डिजिटल सिस्टम से होगी निगरानी

नई व्यवस्था के तहत अस्पतालों में इलाज से जुड़ी प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण किया जाएगा। मरीजों का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रखने की योजना बनाई जा रही है ताकि इलाज की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ सके। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने अधिकारियों को अस्पतालों की व्यवस्था सुधारने और लापरवाही के मामलों में सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार और कार्य में ढिलाई को लेकर अब सख्त रुख अपनाया जाएगा।

रात्रि ड्यूटी में पहले से लागू है सख्ती

स्वास्थ्य विभाग ने बीते महीने से ही रात की ड्यूटी करने वाले डॉक्टरों के लिए विशेष निगरानी व्यवस्था लागू की हुई है। इसके तहत रात्रि पाली में तैनात चिकित्सकों को सुबह अपनी उपस्थिति दर्ज करानी अनिवार्य की गई है। विभाग का कहना है कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वरिष्ठ डॉक्टर रात के समय इमरजेंसी मरीजों की देखभाल के लिए अस्पताल में उपलब्ध रहें और पूरी जिम्मेदारी जूनियर स्टाफ पर न छोड़ें।

सरकारी डॉक्टरों ने रखीं अपनी मांगें

दूसरी ओर सरकारी डॉक्टरों के संगठन बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ ने निजी प्रैक्टिस पर रोक से पहले सरकार के साथ विस्तृत बातचीत की मांग की है। संगठन ने चिकित्सकों की सुरक्षा, आवास और कार्यस्थल सुविधाओं सहित 19 मांगें सरकार के सामने रखी हैं। पटना में आयोजित महासम्मेलन के बाद डॉक्टरों ने अपनी मांगों के समर्थन में पैदल मार्च भी निकाला।

संघ के प्रतिनिधियों ने अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, चिकित्सा पदाधिकारियों को वाहन सुविधा देने और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा से जुड़े कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि डॉक्टरों को सुरक्षित और बेहतर कार्य वातावरण मिलने से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।

राज्य सरकार की नई पहल को स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि डॉक्टर संगठनों की मांगों और विभागीय सख्ती के बीच आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और चर्चा होने की संभावना है।

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