Captagon – देहरादून की फै्ट्री में प्रतिबंधित ड्रग नेटवर्क का बड़ा खुलासा
Captagon – उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से जुड़े एक बड़े मादक पदार्थ मामले ने जांच एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। सहसपुर क्षेत्र में स्थित ग्रीन हर्बल नाम की फै्ट्री में प्रतिबंधित ड्रग ‘कैप्टागन’ तैयार किए जाने का खुलासा हुआ है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की जांच में सामने आया है कि इस परिसर का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क से जुड़े लोग कर रहे थे। एजेंसी के अनुसार, फैक्ट्री मालिक को परिसर उपलब्ध कराने के बदले प्रतिदिन 50 हजार रुपये दिए जा रहे थे।

एनसीबी की कार्रवाई में कई अहम सुराग
एनसीबी ने इस पूरे अभियान को ‘ऑपरेशन रेजपिल’ नाम दिया है। जांच के दौरान एजेंसी ने करीब 227 किलोग्राम कैप्टागन जब्त किया, जिसमें टैबलेट और पाउडर दोनों रूप शामिल थे। इस मामले में पहले एक सीरियाई नागरिक अलब्रास अहमद को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि ड्रग का निर्माण देहरादून के सहसपुर स्थित ग्रीन हर्बल फैक्ट्री में किया जाता था और इस नेटवर्क में एक अन्य विदेशी नागरिक भी शामिल था।
इसके बाद शनिवार देर रात एनसीबी की टीम ने फैक्ट्री परिसर में छापेमारी की। तलाशी के दौरान अत्याधुनिक मशीनें, रासायनिक पदार्थ, कैप्सूल और पैकेजिंग से जुड़ा बड़ा सेटअप बरामद किया गया। अधिकारियों का कहना है कि फैक्ट्री में व्यवस्थित तरीके से ड्रग निर्माण का काम चल रहा था।
फैक्ट्री मालिक पर पहले भी जांच
जांच एजेंसियों के मुताबिक, फैक्ट्री संचालक पहले भी दो अलग-अलग मादक पदार्थ मामलों में जांच के दायरे में आ चुका है। अब एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क के तार किन देशों और किन संगठनों से जुड़े हुए हैं। साथ ही भारत में इसकी सप्लाई चेन और वितरण तंत्र की भी गहन जांच की जा रही है।
सूत्रों का कहना है कि परिसर को बाहरी तौर पर सामान्य औद्योगिक इकाई की तरह रखा गया था, ताकि किसी को संदेह न हो। ड्रग निर्माण का अधिकांश काम सीमित हिस्सों और टीन शेड वाले क्षेत्र में किया जा रहा था।
पुराना रिकॉर्ड भी रहा विवादों में
ग्रीन हर्बल फैक्ट्री का नाम इससे पहले भी चर्चाओं में आ चुका है। दिसंबर 2024 में उत्तराखंड पुलिस ने यहां नकली दवाओं के निर्माण का खुलासा किया था। उस समय फैक्ट्री को सील कर दिया गया था। बाद में अदालत के आदेश पर इसे दोबारा संचालित करने की अनुमति मिली थी। अब सामने आई नई जानकारी ने सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन दोनों की चिंता बढ़ा दी है।
जांच अधिकारियों का कहना है कि पहले जहां यहां नकली दवाओं का मामला सामने आया था, वहीं अब यह परिसर प्रतिबंधित ड्रग निर्माण के बड़े केंद्र के रूप में सामने आया है। बरामद मशीनरी और रसायनों से संकेत मिलते हैं कि उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जा रहा था।
अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर फोकस
एनसीबी अब इस पूरे मामले को केवल स्थानीय अपराध नहीं मान रही है। एजेंसी की प्राथमिक जांच में विदेशी नागरिकों की भूमिका सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संपर्कों की पड़ताल शुरू कर दी गई है। जांच यह भी देख रही है कि तैयार ड्रग्स को किन रास्तों से दूसरे राज्यों या देशों तक पहुंचाया जा रहा था।
मामले के सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने फैक्ट्री परिसर को फिर से सील कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है। साथ ही वित्तीय लेनदेन और किराये से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।