Landslide – केदारनाथ यात्रा मार्ग पर भूस्खलन से फंसे हजारों यात्री
Landslide – केदारनाथ यात्रा मार्ग पर मानसून से पहले ही मौसम का असर दिखने लगा है। रुद्रप्रयाग जिले में मंगलवार रात हुई तेज बारिश के बाद सोनप्रयाग और गौरीकुंड के बीच मुनकटिया क्षेत्र में अचानक भारी भूस्खलन हो गया। पहाड़ी से लगातार मलबा और बड़े पत्थर गिरने के कारण मुख्य मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया। इस घटना से यात्रा कर रहे हजारों श्रद्धालु रास्ते में फंस गए और इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

प्रशासन के अनुसार, स्थिति गंभीर होने पर जिला नियंत्रण कक्ष ने रात करीब 9 बजे एसडीआरएफ को सूचना दी। इसके बाद राहत और बचाव एजेंसियां तुरंत सक्रिय हो गईं। उपनिरीक्षक आशीष डिमरी के नेतृत्व में एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और कुछ ही देर में एनडीआरएफ के जवान भी राहत अभियान में शामिल हो गए।
खराब मौसम के बीच चला रेस्क्यू अभियान
रात का समय, लगातार बारिश और पहाड़ी से गिरते पत्थरों के बीच राहत कार्य बेहद मुश्किल साबित हो रहा था। इसके बावजूद बचाव दल ने सावधानी के साथ अभियान जारी रखा। मौके पर मौजूद जवानों ने यात्रियों को सुरक्षित निकालने के लिए मानव श्रृंखला बनाकर रास्ता तैयार किया।
करीब 25 से 30 जवान लगातार कई घंटों तक राहत कार्य में जुटे रहे। अंधेरे और फिसलन भरे रास्तों के कारण यात्रियों को सुरक्षित निकालना आसान नहीं था, लेकिन टीमों ने संयम और सतर्कता के साथ हालात संभाले। बचाव कार्य के दौरान श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए लगातार निर्देश दिए जाते रहे।
दस हजार से अधिक श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाला गया
एसडीआरएफ की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, इस अभियान के दौरान करीब 10,450 श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाला गया। भारी बारिश और मलबे के बीच फंसे यात्रियों को धीरे-धीरे सुरक्षित मार्ग से बाहर लाया गया। राहत टीमों ने बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को प्राथमिकता देते हुए सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया।
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान जवान यात्रियों का मनोबल बढ़ाते रहे ताकि किसी तरह की घबराहट की स्थिति न बने। कई श्रद्धालुओं ने सुरक्षा बलों की तत्परता और मदद की सराहना भी की।
जेसीबी से हटाया गया मलबा
भूस्खलन के बाद सड़क पर बड़ी मात्रा में मलबा जमा हो गया था, जिससे वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई। प्रशासन ने तुरंत जेसीबी मशीनों को मौके पर भेजा और मलबा हटाने का काम शुरू कराया। बारिश कम होने के बाद राहत कार्य में तेजी लाई गई।
कई घंटों की मशक्कत के बाद सड़क का एक हिस्सा साफ किया गया और धीरे-धीरे यातायात बहाल कराया गया। अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल यात्रा मार्ग पर निगरानी बढ़ा दी गई है और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।
संवेदनशील माने जाते हैं सोनप्रयाग और मुनकटिया क्षेत्र
सोनप्रयाग से मुनकटिया के बीच का इलाका भूस्खलन की दृष्टि से पहले से संवेदनशील माना जाता है। यहां ऊंची पहाड़ियों और ढलानों के कारण बारिश के दौरान पत्थर गिरने की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं। पिछले वर्षों में भी इस क्षेत्र में कई बार यात्रा मार्ग प्रभावित हो चुका है।
प्रशासन ने यात्रियों से मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा करने की अपील की है। सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
लगातार बारिश से बढ़ रही मुश्किलें
मई महीने में भी केदार घाटी में लगातार हो रही बारिश यात्रियों की चिंता बढ़ा रही है। मंगलवार रात करीब आधे घंटे तक हुई तेज बारिश ने यात्रा मार्ग की स्थिति बिगाड़ दी। कई स्थानों पर यात्रियों को रोकना पड़ा, जबकि प्रशासन लगातार लोगों से सावधानी बरतने की अपील करता रहा।
अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में मौसम को देखते हुए यात्रा मार्ग पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।