H1BVisa – अमेरिकी टेक छंटनी से बढ़ी भारतीय पेशेवरों की चिंता
H1BVisa – अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों में हाल के महीनों में हुई छंटनी का असर हजारों भारतीय पेशेवरों पर पड़ रहा है। Meta, Amazon और Oracle जैसी कंपनियों में नौकरी जाने के बाद H-1B वीजा पर काम कर रहे कई भारतीयों के सामने अब अमेरिका में बने रहने की चुनौती खड़ी हो गई है। अमेरिकी इमिग्रेशन नियमों के तहत नौकरी खत्म होने के बाद विदेशी कर्मचारियों को नया रोजगार खोजने के लिए केवल 60 दिनों का समय मिलता है।

अगर इस अवधि के भीतर नया नियोक्ता वीजा स्पॉन्सर नहीं करता, तो संबंधित व्यक्ति को अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है। ऐसे में लंबे समय से अमेरिका में रह रहे भारतीय परिवारों के सामने रोजगार के साथ-साथ आवास, बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
B-2 वीजा विकल्प भी आसान नहीं
कई प्रभावित कर्मचारी फिलहाल B-2 विजिटर वीजा के जरिए अस्थायी राहत पाने की कोशिश कर रहे हैं। इस वीजा के तहत कुछ समय तक अमेरिका में रहना संभव होता है। हालांकि इमिग्रेशन विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में यह रास्ता भी पहले की तुलना में ज्यादा कठिन होता जा रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी इमिग्रेशन अधिकारी अब ऐसे मामलों में अतिरिक्त दस्तावेज मांग रहे हैं। कई आवेदनों को लेकर जांच प्रक्रिया भी सख्त हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के महीनों में स्टेटस बदलने से जुड़े मामलों में अस्वीकृति की संख्या बढ़ी है।
भारतीय पेशेवर सबसे ज्यादा प्रभावित
H-1B वीजा कार्यक्रम में भारतीयों की हिस्सेदारी सबसे अधिक मानी जाती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, हाल के वर्षों में स्वीकृत H-1B आवेदनों में बड़ी संख्या भारतीय नागरिकों की रही है। इसी वजह से टेक सेक्टर में हुई छंटनी का असर भारतीय समुदाय पर ज्यादा दिखाई दे रहा है।
2026 में अब तक कई टेक कंपनियों में बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की कटौती की गई है। उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, एक लाख से ज्यादा लोग नौकरी गंवा चुके हैं, जिनमें भारतीय पेशेवरों की संख्या भी काफी अधिक बताई जा रही है।
परिवार और आर्थिक जिम्मेदारियों की चिंता
अमेरिका में लंबे समय से रह रहे कई भारतीय ग्रीन कार्ड प्रक्रिया के इंतजार में हैं। ऐसे लोगों ने वहां घर खरीदे हैं, बच्चों की पढ़ाई शुरू कराई है और कई वित्तीय जिम्मेदारियां उठाई हैं। अचानक नौकरी जाने के बाद उनके सामने आर्थिक अस्थिरता का खतरा बढ़ गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात केवल रोजगार तक सीमित नहीं हैं। यह स्थिति कई परिवारों के लिए मानसिक दबाव और भविष्य को लेकर अनिश्चितता भी पैदा कर रही है।
नए विकल्पों की तलाश शुरू
कई पेशेवर अब वैकल्पिक रास्तों पर विचार कर रहे हैं। कुछ लोग F-1 छात्र वीजा या O-1 वीजा जैसे विकल्पों की जानकारी जुटा रहे हैं। वहीं कुछ भारतीय अब कनाडा और यूरोपीय देशों में अवसर तलाशने लगे हैं, जहां तकनीकी क्षेत्र में कुशल कर्मचारियों की मांग बनी हुई है।
इमिग्रेशन सलाहकारों का मानना है कि आने वाले समय में विदेशी पेशेवरों के लिए अमेरिकी वीजा प्रक्रिया और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। इसलिए प्रभावित कर्मचारियों को समय रहते कानूनी और पेशेवर सलाह लेने की जरूरत होगी।
AI बदलाव का भी असर
विशेषज्ञों के अनुसार, टेक कंपनियां अब तेजी से Artificial Intelligence आधारित संरचना की ओर बढ़ रही हैं। कई कंपनियां अपने संचालन मॉडल को बदलते हुए कर्मचारियों की संख्या कम कर रही हैं। इससे तकनीकी क्षेत्र में पारंपरिक भूमिकाओं पर दबाव बढ़ रहा है और विदेशी कर्मचारियों की चिंताएं भी बढ़ती जा रही हैं।