CancerRisk – युवाओं में कैंसर का खतरा बढ़ा रही है कॉर्पोरेट लाइफस्टाइल
CancerRisk – भारत में कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है और अब यह बीमारी सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई है। डॉक्टरों का कहना है कि 30 से 40 वर्ष की उम्र के लोगों में भी कैंसर के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बदलती जीवनशैली, लंबे समय तक बैठकर काम करना, तनाव और अनियमित खानपान इसके बड़े कारण बनते जा रहे हैं।

ऑन्कोलॉजिस्ट डॉक्टर वरुण गोयल ने हाल ही में एक ऐसे मरीज का उदाहरण साझा किया, जिसकी उम्र केवल 34 वर्ष थी। वह एक निजी कंपनी में मार्केटिंग मैनेजर के पद पर कार्यरत था। देखने में पूरी तरह स्वस्थ लगने वाले इस युवक को कई महीनों से थकान और पाचन से जुड़ी समस्याएं हो रही थीं। शुरुआत में उसने इसे सामान्य तनाव और खराब दिनचर्या समझकर नजरअंदाज किया, लेकिन जांच में उसे स्टेज-3 कोलोरेक्टल कैंसर होने की पुष्टि हुई।
लंबे समय तक बैठना बन रहा खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक आधुनिक कॉर्पोरेट संस्कृति में लोग लगातार 10 से 12 घंटे तक बैठकर काम कर रहे हैं। इस दौरान शारीरिक गतिविधि बेहद कम हो जाती है और खानपान भी असंतुलित रहता है। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसी जीवनशैली शरीर में कई गंभीर बदलाव पैदा करती है, जो आगे चलकर कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
एक शोध में भी यह सामने आया है कि लंबे समय तक बैठे रहने की आदत से कोलोरेक्टल, फेफड़ों और अन्य प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, केवल जिम जाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि दिनभर सक्रिय रहना भी जरूरी है। लगातार बैठे रहने की स्थिति को अब “एक्टिव काउच पोटैटो सिंड्रोम” जैसे शब्दों से भी जोड़ा जा रहा है।
मोटापा और सूजन से बढ़ती समस्या
डॉक्टरों के अनुसार लंबे समय तक निष्क्रिय रहने से शरीर में अतिरिक्त चर्बी जमा होने लगती है। यह केवल वजन बढ़ाने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि शरीर में सूजन पैदा करने वाले तत्वों को भी बढ़ावा देती है। स्वास्थ्य रिपोर्ट्स में बताया गया है कि मोटापा कई प्रकार के कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर में लगातार सूजन रहने से कोशिकाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इससे ब्रेस्ट, लीवर, कोलन और किडनी कैंसर जैसी बीमारियों की आशंका बढ़ सकती है। शहरों में कामकाजी लोगों के बीच मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जिसे डॉक्टर गंभीर चेतावनी मान रहे हैं।
तनाव और नींद की कमी का असर
कॉर्पोरेट कर्मचारियों के बीच बढ़ता काम का दबाव भी स्वास्थ्य के लिए चुनौती बनता जा रहा है। लगातार लक्ष्य पूरा करने की चिंता, देर रात तक काम और मानसिक तनाव इम्यून सिस्टम को कमजोर कर सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक तनाव सीधे कैंसर का कारण नहीं बनता, लेकिन यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करता है।
इसके साथ ही पर्याप्त नींद न लेना भी बड़ा जोखिम माना जा रहा है। देर रात तक स्क्रीन देखने और अनियमित शिफ्ट में काम करने से शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी प्रभावित होती है। स्वास्थ्य एजेंसियों ने भी नाइट शिफ्ट और खराब स्लीप साइकिल को गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों से जोड़ा है।
खानपान की आदतों पर भी सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि कई कॉर्पोरेट ऑफिस में मिलने वाला अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड भी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। पैकेट स्नैक्स, मीठे पेय और अधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ शरीर में असंतुलन पैदा करते हैं। कुछ अंतरराष्ट्रीय शोधों में ऐसे खाद्य पदार्थों के अधिक सेवन को कैंसर के बढ़ते जोखिम से जोड़ा गया है।
डॉक्टर सलाह देते हैं कि कामकाजी लोगों को फाइबर युक्त भोजन, ताजे फल और संतुलित आहार को प्राथमिकता देनी चाहिए। साथ ही धूम्रपान, शराब और अत्यधिक तनाव से बचने की जरूरत है।
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लगातार थकान, वजन कम होना, पाचन संबंधी बदलाव, लंबे समय तक खांसी, शरीर में गांठ या बार-बार दर्द जैसी समस्याएं बनी रहें तो तुरंत जांच करानी चाहिए। शुरुआती स्तर पर पहचान होने से कई गंभीर बीमारियों का इलाज आसान हो सकता है।